Add To collaction

गांव

                           गांव          

गांव का नाम सुनते ही  लोगों के चेहरे पर खुशियों की  कैसी   ये एक जानी -पहचानी सी लहर  दौड़ पड़ी है। गालों पर लालिमा लिए किसी बाग़ में खिलें गुलाब के फूलों सी चेहरा मानों  सभी के खिल उठे हैं । गांव में बिताए वे खुशियों के पलों को याद कर शरीर का रोम -रोम नई कोमल पत्तियों की तरह पुलकित होने लगी है। आंखों में छायी है कैसी ये अजीब सी शांति और बिजलियों सी चमक है आयी ।  पांवों में  बंधी घुंघरू गांव का नाम सुन खुद-ब-खुद गुंज उठें हैं और पैर लगीं हैं एक लय में थिरकने। गांव में बिताए वो बचपन के सुहाने और खुबसूरती से भरे पल आंखों के सामने  सभी के एकाएक जीवित हो उठती है। गांव में कटहल के पेड़ों पर मां की फटी -पुरानी साड़ियों से बनी हुई वे झूले जिसमें बैठ कर बरसात की रिमझिम बूंदों  में भींगते हुए कभी खुशी से चिल्लाते तो कभी डर से कांपती हुई आवाज़ में शोर मचाना। बाग़ से आम और लीचियों की चोरी करते पकड़ा जाने पर कभी  मालिक के हाथों मार खा कर वहां से भीगी बिल्ली बन खिसियाते हुए निकाल जाना तो कभी मालिक को अपनी बातों में उलझाकर बेवकूफ बनाते हुए वहां से  निकल कर भाग जाना। कभी मन करता तो गांव में बनी चौपाल में सुबह और शाम बड़ों के साथ बैठक कर  घर गृहस्थी की तो कभी देश दुनिया से जुड़ी ख़बरें सुनना । पहले गांव में बसे हुए लोग आर्थिक रूप से भले ही गरीब होते  थे ।लेकिन उनका ह्रदय बहुत विशाल हुआ करता था और आज भी है। गांव के सारे लोग अपना हो या पराया सबका करते मान -सम्मान घर आए अपने अनजान लोगों को भी आदर  पूर्वक लोटा में पानी देते करते बैठकर  उनसे प्रेम भरी बातें ।आज भी गांव के लोगों  से अपने पन की बू है आती अपने हिस्से का खाना दूसरों को खिलाकर खुश हो जाते हैं और उनकी आंखों में तनिक भी पछतावा नहीं होता ।कहते हैं भारत देश की आत्मा गांवों में बसा करती है लेकिन  देश की आत्मा कहलाने वाली इन गांवों को लग गई हवा शहरों की।आज गांवों को छोड़ चल पड़े लोग शहरों की ओर गांव होने लगी है अब खाली चारों तरफ़ पसर रही है सन्नाटा  छाने लगी है सुनापन रो रही है सीसक- सीसक गांव अपनों को खो कर । गिर रही है मिट्टी  की वे घरें  जिसमें कभी गुंजा करती थी किलकारियां सुनाई देती थीं मां की लोरियां।थम  गई गाय- बैलों और बकरियों की गले में बंधी  घंटी और घुंघरू की आवाजें अब खोने लगा है गांव ये मेरा शहरों की इन चकाचौंध भरी दुनिया में आने लगा है ऐसा वक्त जब गांव सिर्फ लोगों के यादों में बसा करेगा।

   1
1 Comments

vinay chaubey

12-Oct-2025 08:11 PM

Wow! The way you write about the village story really touched me. After reading your sonmer temple story, I came here where I found another different and amazing story about village life. We all belong to the village, and I know what the feeling is when we have to leave our village for a job and study. After reading this, it's reminded me of all those things that we once experienced in the village

Reply