कार्तिक मास-17-Oct-2025
कार्तिक मास
श्री हरि विष्णु को समर्पित पावन" कार्तिक मास "की हुई शुभारंभ "मधुर शरद पूर्णिमा"की अगली सुहानी सुबह में।
लगी है ह्रदय में भक्ति की' मेला '!
उमड़ रही रह - रह कर श्रद्धा - सुमन की बेला।
खिल उठा है ,मन खुशियों से!
है?कितना उमंग भरा पल।
छायी आंखों में भक्ति की 'नशा'!
तन लिपटीं खुशियों कि एक चादर से।
चलने लगी है स्वत: होंठों पर नाम "प्रभु श्री राम "
के पवित्र जाप की माला।सुन उनकी नामों की
महिमा कानों में।मचल उठा ये मन !
'कार्तिक स्नान 'को उठा प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व
हाथ में गंगा जल की लोटिया लिए पहुंच
गया श्री राम धाम !" रामरेखा "सिमडेगा में।
सुल - सुलाती हुई ठंडी हवाएं ख़ुशी में!
झूम छूने लगी तन को! गुन गुनाते हुए
श्री" राम धुन "।
कल - कल कर धारा में बहती
सुरीली संगीत में नाचती नदियां!
ख़ुशी में उफन रही नदियां प्रभु
चरण छूने को।
बरसों से है व्याकुल , हैं सदियों से
प्यासी नदियां! प्रभु श्री राम की !
एक झलक मात्र पानें को ।
है आंखों में उनकी श्रद्धा स्नेह की आशु।
नीले अम्बर में इधर से उधर उड़ती
इठलाती - बलखाती नन्ही परिंदों
की टोली चहक-चहक कर पहुंचाने
लगी संदेश जन-जन के कानों तक!
कह रही है उनकी "वाणी मधुर" लोगों से
ये ही है ,वो महिना पावन जिसमें
चौदह वर्ष की कठोर वनवास से!
प्रभु श्री राम मां जानकी और भैया
लक्ष्मण संग लौट आए अपने जन्म भूमि अयोध्या !
अमावस्या की डरावनी काली रात में।
बिछी थीं !प्रभु की राहों में हजारों फूल!
प्रज्ज्वलित हुई थीं ,मिट्टी के लाखों दीपक ,
गुंजी सहनाईयां बजने लगा ढ़ोल नगाड़ा संग
थिरक - थिरक कर बावली सी हुई पूरवाईया।
प्रभु श्री राम के स्वागत में दूलहन की तरह
सज संवर कर खड़ी थीं !अयोध्या नगरी अपने
कूल दीपक के इंतिज़ार में।
हुई एक नई शुभारंभ दीपों से सजी त्योहार की।
मनने लगी हर वर्ष दीपावली कार्तिक मास की
घनी काली रात की अमावस्या में।
सीता मैया ने मनाई थी,छट!
गंगा नदी की घाट पर।
एकादशी की मधुर घड़ी में श्री हरि
बिष्णु उठ जाते हैं अपनी तीन
महीनों की गहरी निद्रा से।
होता है उनका भव्य स्वागत!
घर आंगन में रंग -बिरंगी रंगोली बनाकर।
जलायीं जाती तुलसी मां के चरणों में दिया। लगाया
जाता है गांव - गांव में देव उठान जतरा।
ब्याही जाती मां तुलसी संग बिष्णु के।
दिन - रात हर - घड़ी ,हर एक पल जिसकी थी ,इंतिज़ार।
आ गई वो 'मधुर घड़ी 'वो 'वक्त निराली '!
"कार्तिक पूर्णिमा " कि !वो पावन रात ।
जिसमें कार्तिक स्नान कर' पुण्य 'पाने
को उमड़ पड़ी है जन सैलाब!
श्रद्धा और भक्ति,विश्वास की!
डुबकियां लगाने
तालाबों और नदी की घाटों पर।
उफन रही नदियां श्री राम भक्तों के स्वागत में
हाथों में लेकर हजारों फूल और लाखों दिये।