ग्लानि से भरा एक पल -01-Nov-2025
ग्लानि से भरा पल
बहुत समय पहले की बात है ।एक दिन एक व्यक्ति घूमते फिरते किसी गांव के अखाड़े में जा पहुंचा। जहां पहले से ही गांव के चार पांच बड़े - बुज़ुर्ग व्यक्ति बैठ कर प्रकृति से जुड़ी किसी गंभीर समस्याओं पर विचार - विमर्श कर रहे थे। अचानक अपने सामने एक अनजान व्यक्ति को देख कर लोग चौंक गए। उनकी मुख से शब्दों का एक भी बोल नहीं निकली वे बस अपनी खुली नेत्रों से उस अज़नबी को निहारे जा रहे थे।उस अज़नबी की आंखों में एक विचित्र सा आर्कषण था। वहां मौजूद सभी लोग उसकी ओर खिंचे चले आने लगे और आ कर उसके ईद गिर्द चरणों के नीचे बैठ गए।
वह अजनबी व्यक्ति अखड़ा में रखी एक बड़ा सा पत्थर के उपर पैर पर पैर रख के आराम से बैठ गया।
उस अज़नबी के चेहरे पर दिव्य अलौकिक प्रकाश की रोशनी चमक रही थी। माथे पर चंदन और कुमकुम से बनी तृपुण्ड । उसने सिर पर सोने की मुकुट पहन रखी है, जिसमें हीरे की सुन्दर नकासी की गई है।गले में बेशकिमती कोहिनूर हीरों की हार तथा सुगंधित फूलों से बनी हार पहन रखा है। जिसकी खुशबू से पूरा गांव महक उठी है। कानों में सोने की कुंडल घुंघराले बाल कलाइयों पर सोने और चांदी की खुबसूरत कडा। कमर में सोने की कमर धनी तथा नरम कोमल पैरों पर लाल रंग की आलता से सजी खनखनाती चांदी के पायलों की झंकार ! लोगों का मन मोह रही थी।
तन पर सफ़ेद सुंदर तरासी गई मखमली अंग वस्त्र धारण किए हुए। वह अजनबी व्यक्ति हर दृष्टि से भगवान लग रहे थे।
उसके हाथों में पड़ी एक सफ़ेद रंग की बही खाता है जिसमें पूरे गांव के लोगों का नाम, स्थान, जन्म का समय , जन्म हुआ है तो किस कार्य के लिए हुआ है, मृत्यु कब होगी? आदि आदि लिखा हुआ था। इतनी सारी बातें साक्षी थी कि वह!अजनबी कोई साधारण आदमी नहीं है। कुछ पल बैठने के बाद अजनबी ने अपनी बही खाता खोली और अपने पास बैठा एक युवक की जन्म कुंडली बतलाने लगा। उस अज़नबी ने युवक के बारे में जितनी भी जानकारी दी वे सब जानकारियां सच थी। उसकी दी जानकारियों में लेश मात्र भी कमियां नहीं थी। वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्य से उसकी बातों को सुनने लगे और पंक्ति में खड़े होकर। एक एक करके आगे बढ़ते हुए अपनी भविष्य जानने लगे।
अपरिचित अजनबी व्यक्ति की ख्याति पूरे गांव में आग की लपेटों की तरह फ़ैल गई। गांव के जितने भी लोगों ने अपनी आंखों से कुंडली देखी और भविष्य सुना वे उसकी तारीफ में, प्रसंशा में ,अजनबी को भागवान शब्द की सुन्दर हार से सम्मानित करने लगे। गांव के गिने चुने बचे हुए लोग भी प्रसंशा सुनकर अखड़ा में आ पहुंचे थे। इसी गांव के दुष्ट बुध्दि वाले दो शराबी मनचले लड़कों को अजनबी की प्रसंशा हज़म नहीं हुई।वे दोनों अजनबी को तथा उसकी कही बातों को गलत ठहराने की घृणित मंशा ह्रदय में लिए उसे परखने (जांचने) उसकी योग्यता की पुष्टि करने चल पड़े। शराब और अहंकार की नशा में धूत घमंडी लड़के जाने से पूर्व अपने पैरों पर घुटना के ठीक नीचे स्वास्थ्य सुरक्षित पैरों में रुमाल ऐसे तरीके से बांधा कि वहां महीने भर से घाव हुआ हो।
ऊंची गर्दन कर के शान से चलते हुए दोनों अखड़ा में बैठे अजनबी के समीप जा कर अकड़ के साथ पुछने लगे । तुम सच में भगवान हो,बुद्धिमान ज्योतिष हो तो इतना तो बतलाओ कि हम दोनों के पैरों पर किसी प्रकार की घाव या कोई निशान है या नहीं। दोनों शराबियों की कठोर बातें सुन कर अजनबी व्यक्ति बहुत ही धैर्य और संयम से ज़वाब दिया। मैं क्या ?बतलाऊंगा! ऐसा करो कि तुम दोनों उस बहती हुई झरना के उस पार हो कर अपने पैरों को स्वयं देख लो ज्ञात हो जाएगा।अहंम में अंधे दोनों शराबी अजनबी के कहे अनुसार झरना के उस पार जा कर अजनबी की ओर व्यंग्यात्मक मुस्कान और चुभन भरी दृष्टि से देखते हुए गर्व के साथ पैरों से रुमाल हटायी और झुक कर अपने पैरों को देखा। देखते ही उनके मुख से एक जोर दार दर्दनाक चिख निकल पड़ी। उनके दर्द भरे विलापों तथा करुणा मयी पुकारों ने अखड़ा में उपस्थित लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।भय और चिंता से दोनों थर-थर कांपने लगे थे।उनकी आंखों से दु:ख और पश्चाताप के आंशु झर झर बहने लगी ।घोर लज्जा से दोनों की नज़रे नीचे झुक गई। ह्रदय ग्लानि से भर गया। उनके स्वास्थ्य पैरों पर विकराल खलंदर घाव हो गया था ।जिसमें बड़े बड़े सफ़ेद रंग के मुरमुरे के आकार के कीड़े घाव में लग गए थे। और घावों से सड़न की बू आ रही थी। शराबियों को अपने किए गलतियों का एहसास होता और वे अजनबी से क्षमा मांग पाते इससे पहले ही । उनके किए की दण्ड दे कर गांव के अखाड़े में बैठा वो अजनबी अदृश्य हो चुका था। उसने दोनों शराबियों को एक क्षण भी पश्चात्ताप करने का मौका नहीं दिया।