नहीं मिला
दिल को कहीं सुकून का इम्काँ नहीं मिला,
मुझको मदावा-ए-गमें-हिज़राँ नहीं मिला//1
कितने मक़ाम मुझको मिले जिंदगी मग़र,
उस ज़ुल्फ़ सा कोई मुझे जिन्दां नहीं मिला//2
हर रोज़ हर क़दम पे नया इम्तिहान था,
मुझको पर इक़ सवाल भी आसां नहीं मिला//3
महफ़िल में लोग आपके आशिक़ तो थे मग़र,
हम सा कोई भी चाक-गरेबाँ नहीं मिला//4
जो भी मिला वो बन के ख़ुदा ही मिला मुझे,
दुन्या की भीड़ में कोई इंसाँ नहीं मिला//5
हैरान हूँ मैं आज भी आईना देखकर,
मुझको तो अक्स भी मिरा यकसाँ नहीं मिला//6
'राजन' ज़मीने दिल पे जहां तक नज़र गई,
सह्रा मिला नज़र को, गुलिस्ताँ नहीं मिला//7
✍️
राजन तिवारी 'राजन'
इंदौर (म.प्र.)
7898897777
Aliya khan
04-Apr-2021 09:17 AM
Nice sr
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Rajan tiwari
13-May-2021 05:20 PM
Thank you so much
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Apeksha Mittal
03-Apr-2021 07:28 PM
बहुत अच्छा लिखा सर
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Rajan tiwari
13-May-2021 05:20 PM
बहुत बहुत शुक्रिया आपका
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