Shailja Gupta

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चाँदनी


चाँदनी......


जब भी 
उदास होता है मन
याद आता है 
रात के अंधेरे में
उसका 
अक्स उजला 
अक्सर ही 
मुस्कुराता
नजर आता है
तनहा सी
नींद जो आंँखों से 
रूठी थी
तब मीठी चाँदनी बन
खिड़कियों से
मन के अंधेरे में
उजाले का
संदेश लेकर
आता है वो
जानते हैं
चांद धोखा नहीं देता
हर बार 
मिलता है 
पूर्णिमा की 
उजली सी रात में।।

#लेखनी
#लेखनी कविता
#लेखनी प्रतियोगिता

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3 Comments

Swati chourasia

31-Oct-2021 07:19 AM

Very beautiful 👌

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खूब लिखा आपने 👌👌

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Niraj Pandey

30-Oct-2021 08:06 PM

वाह शानदार

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