इश्क यादगार
उस शोख़ ने तिरछी नजर से वार कर दिया,
इस दिल को गमे इश्क़ से दो चार कर दिया//1
वो वक़्त कि जिस पर लिखा था हर्फ़े वस्ल-ए- शब ,
हमने वो बदल कर के इंतजार कर दिया//2
मुझको तो मुहब्बत पे नाज था तिरी बहुत,
पर तेरे तग़ाफ़ुल ने बेक़रार कर दिया//3
तू ने जो दिया दर्द रायगां वो कब रहा,
हमने भी तो आँखों को आबशार कर दिया//4
पहले ही कहाँ कम था हुस्न का तिरे नशा,
काकुल ने सबा को भी मुश्क़बार कर दिया//5
ये शाम भी आई तो ले के आई ग़म तेरा,
ज़ख़्मों के लिए दिल को फिर तयार कर लिया//6
'राजन' ये मिले हैं गुहर जो आपकी तुफ़ैल,
इनसे ही गमे इश्क़ यादगार कर लिया//7
✍️
राजन तिवारी 'राजन'
इंदौर (म.प्र.)
7898897777
हर्फ़ = शब्द
वस्ल-ए- शब = मिलन की रात
तग़ाफ़ुल = बेरुख़ी
रायगां = व्यर्थ
आबशार = झरना
काकुल = ज़ुल्फ़
सबा = सुबह की ताजा हवा
मुश्क़बार = सुगंधित
गुहर = मोती
तुफ़ैल = कारण
Shilpa modi
05-May-2021 07:37 PM
वाह
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Rajan tiwari
13-May-2021 12:12 PM
बहुत शुक्रिया आपका
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SAGAR BABAR
08-Apr-2021 09:17 AM
ग्रेट सर
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Rajan tiwari
13-May-2021 12:12 PM
आभार आपका
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Apeksha Mittal
08-Apr-2021 12:00 AM
बहुत अच्छी शायरी लिखी है सर , ओर जो अपने शब्द के उच्चारण साथ लिख दिए वो बहुत सही क्या , उससे सब समझ आ गया
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Rajan tiwari
13-May-2021 12:12 PM
आभार आपका, कोशिश करता हूँ कि कठिन शब्दों के अर्थ लिखूँ, आगे भी ध्यान रखूँगा🙏🙏🙏😊😊
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