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बचपन की वह लड़की

कहा खो गयी वह लडकी जो ठहाके से घर महकाती थी 
सारे मुहल्ले मे धूम मचाती थी

गर्मियों की तेज दोपहरियो मे भी,धीरे से सहेलियो संग चबूतरे पर गुप्पी खेलती थी ।

कहा खो गयी बह लडकी खेल कर थक जाने पर मम्मी से पैर दबबाती थी ।

लडते झगडते भाई बहन संग दिन भर ,शाम को बैठकर, रसमलाई खाती थी ।

पापा का  चश्मा लगाकर कर बैक मैनेजर बनने की नकल करती थी।

कहा खो गयी बह लडकी जो भारत  का नक्शा रोटियो मे
बनाकर खुश हो जाती थी ।

कहा खो गयी बह लडकी जो सहेलियों के घर जाकर 
घण्टो धूम, मचाती थी 

और फिर न जाने कितने बहाने बनाकर ,सहेलियो को डाट से बचा लेती थी ।

जितना हँसती ,खिलखिलाती ,और गप्पे लगाती थी उतनी ही शरारत कर जाती थी ।

कहा खो गयी बह लडकी जो  माँ के साथ साथ घण्टो बतियाती थी ।

शायद सयानी होकर ससुराल पहुँच गयी बह लडकी समझदार जो हो गयी थी 

अब जिदे नही समझौते करना सीख गयी थी ,बात टालना नही मानना सीख गयी थी ।

संस्कारो से रची बसी बह लडकी माँ बाबा का  मान रखना सीख गयी थी ।

शायद बह लडकी झूठ बोलना सीख गयी थी ,माँ के पूछने पर टालना सीख गयी थी ।

शायद बह लडकी समझदार हो गयी थी ।आत्म सम्मान से जीना सीख गयी थी 

शायद बह लडकी सबकी खुशी मे अपनी खुशी ढूढना सीख गयी थी ।

भारत का नक्शा अब रोटियो मे नही बनाती ,अब लाजबाब व्यजंन बनाना सीख गयी थी ।

अब नखरे बताना नही ,अब सबके नखरे उठाना सीख गयी थी समझदार जो हो गयी थी ।

भीड से डटकर मुकाबला करना सीख गयी थी क्योकि आत्म निर्भर जो,हो गयी थी ।

शायद वह लडकी स्वाभिमान से दुनियाँ को.जबाब देना और जीतना सीख गयी थी ।

शिक्षा को शस्त्र बनाकर ,गलत बात पर आवाज उठाना सीख गयी थी ।

शायद बह लडकी कठिन परिस्थितियों मे भी पूरे मनोबल से जीतना सीख गयी थी ।

आज वह लडकी अपने मूल्यो और सिधान्तो पर अडिग होकर जीतना सीख गयी थी।

बचपन की चंचल ,शरारती ,हसमुख लडकी आज गम्भीर होकर निर्णय लेना सीख गयी थी ।

और अपने निर्णयो से ,��

मीनाक्षी शर्मा✍️

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3 Comments

Zakirhusain Abbas Chougule

20-Feb-2022 11:01 PM

Bahut khoob

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Rajeshwari thakur

30-Jul-2021 08:28 PM

वाह बेहतरीन 🙏🏻🌹

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Rukayya

10-Apr-2021 08:28 PM

🧑👍

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