Diksha Sharma

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उड़ान

छोटे-छोटे पंखों से वह उड़ती है,
पर आसमां को वह भी छूती है।
थोड़ी धीमी चाल से वह चलती है,
पर मंज़िल पर वह भी पहुँचती है।

उसे अफ़सोस नहीं अपने छोटे कद का,
नहीं है ग़म अपनी धीमी चाल का।
वह जानती है अपनी राह को,
अपने बुने उन सपनों के जहां को।

वह जा रही है आसमां में,
अपनी ख्वाहिशों के जहां में।
वह उड़ रही है बस उड़ रही है,
देखो वह अनंत को छू रही है।

देखो वह अनंत को छू रही है।

-दीक्षा शर्मा
गोरखपुर

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2 Comments

बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति

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shakoontala

07-Jun-2021 04:15 AM

सुन्दर

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