ख़त
मेंने एक कागज़ पर
कुछ शब्द सजा कर भेजें हैं
वक्त मिलें तों पढ़ना इनको
मेरी तरह यें भी तुमसे
बातें करनें को आतुर हैं
मचल रहें थें जानें कब से
यें भी तुमसे मिलने को
मैं हीं अपने मन में इनको
बहला फुसलाकर रखता था
नाज़ुक मिजाज है इनका
कहीं टूट ना जाए दिल इनका
तुम मना ना करदों पढ़ने से
इसलिए लिखने से डरता था
लेकिन इनकी ज़िद से आखिर
तंग होकर मेंने इनको
पास तुम्हारे भेजा है
तुम भी अब देखो इनको
थोडा सा मान तो दे देना
पूरा पढ़ के इस खत को
फिर से एक बार दोहरा देना
इस बहाने मेरे ये शब्द
थोडा सा खुश हो लेंगे
तेरे होठों को छू लेंगे..।।
✍️ Zulfikar Ali
Shashank मणि Yadava 'सनम'
23-Aug-2022 06:44 AM
लाजवाब लाजवाब Superr से भी बहुत बहुत uperr
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Zulfikar ali
11-May-2021 04:22 PM
बहुत बहुत शुक्रिया 🙏
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Aliya khan
11-May-2021 04:14 PM
बहुत खत लिखा है आप ने
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