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लेखनी प्रतियोगिता -02-Dec-2021


पहली मुलाकात

22 अप्रैल, 2138 की शाम:

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक संवेदनशील गोपनीय मीटिंग हो रही थी।

"हमने अपने सभी प्रयास खो दिए हैं। तीसरा विश्व युद्ध अब अपरिहार्य है।"

"विश्व युद्ध और विश्व का विनाश निश्चित है। इसलिए हमें यह कदम उठाना होगा।"

"ये सही है। क्या टाइम मशीन की टेस्टिंग पूरी हो गई है?”

"समजो हो गयी है, सर।"

"इसका मतलब हम मिशन एक्स के लिए तैयार हैं?"

"हां, बिल्कुल, लेकिन क्या अतीत में दखल देना प्रकृति के नियम के खिलाफ नहीं है?"

"इधर मानवी अस्तित्व का सवाल है, इसलिये अब उस बारें में सोचने का मतलब नहीं है। जिंदा ही नहीं बचेंगे तो नियम का क्या अचार डालेंगे..? सन २०५६ में जाकर ही उस घटना को होने से रोकने के बाद ये विश्वयुद्ध रुक सकता है।"

"ठीक है सर, हम तैयार हैं।"

प्रशांत महासागर में छुपी हुई वो सीक्रेट लैब कब से तैयार थी। हूबहू इंसान जैसे दिखनेवाले, व्यवहार करने वाले दो ह्यूमनाइड्स अतीत में जाने के लिए तैयार थे। उनका दिमाग एक सामान्य इंसान की तुलना में अधिक सक्षम था। एक के पास राजनीतिक दुविधा को हल करने के लिए आवश्यक सब कुछ भरा गया था, जबकि दूसरे के दिमाग में क्या चल रहा है बता पाना मुश्किल था। दोनों को पता था कि २०५६ में क्या करना है, किससे मिलना है। उनका पोशाक भी उस समय के लिए प्रासंगिक था।

सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद वह दोनो टाइम मशीन में बैठ गए। प्रोग्राम का सॉफ्टवेयर चलने लगा। वर्ष 2056 टाइप करने के बाद, वह टाइम मशीन पहली बार यात्रा करने के लिए तैयार थी।

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उन दोनों ने किसी तरह अपनी बंद आंखें खोलीं। उनका सिर जाम हो गया था, उन दोनों को याद नहीं कि बीच में क्या हुआ था। उन्होंने किसी तरह खुद को बैलेंस किया और खड़े हो गये। रात का समय था और आसपास कोई टाइम मशीन नहीं दिख रही थी। 

किसी ने चिल्लाया "हे फेलाज..s"। तभी घोड़े के टापों की आवाज आयी। पहली बार उन्होंने चारों ओर देखा। वह दोनों एक व्यस्त सड़क के बीच में खड़े थे। घोड़ों से चलने वाली गाड़ियाँ चल रही थीं, पुराने जमाने की वेशभूषा में लोग घूम रहे थे, और चारों ओर महलों जैसे बड़े-बड़े भवन थे; और सबसे खास बात ये है कि लोग इन दोनों को अजीब निगाहों से देख रहे थे। 

"नमस्कार दोस्तों, मुझे लगता है कि तुम खो गए हो।" उनके कानों पर एक भारीभरकम आवाज पड़ी। वह एक सुंदर युवक था जिसके चेहरेपर पर रौबीली मूंछें और सिर पर ऊँची टोपी थी।

"हाँ, खो गये ऐसा ही कहना होगा.!"

"अच्छा। मुझे खोए हुए लोगों से प्यार है। मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूँ?"

" अगर अजीब ना लगे तो एक सवाल पूछें?" 

"बेशक.."

"यह कौन सा साल है?"

"१८८४"

दोनों ने हैरानी से एक-दूसरे को देखा। टाइम मशीन ने उन्हें गलत समय पर पहुंचा दिया था। वापस जा भी नहीं सकते क्योंकि अधिकांश टाईम मशीन भी नष्ट हो गयी थी। ह्यूमनाइड्स होने के नाते वो सामान्य इंसान की तरह दुख भी नहीं जता सकते, लेकिन अगर पूरी मानव जाति संकट में है, तो थोड़ा बहुत दुख होगा ही ना।

"चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करूँगा।"

"थैंक्स सर..!"

"दोस्तों आपने अभी तक अपना नाम नहीं बताया।"

वो दोनों असमंजस में थे कि बताये या नहीं। क्योंकि उनके समय में ह्यूमनॉइड्स के इंसानों जैसे नाम नहीं होते थे।

"यदि आपको नहीं बताना तो रहने दो।"

"मैं AL304D हूं और यह AL305D है। थोड़ा मुश्किल हैं। लेकिन आप हमें कोई भी नामों से बुला सकते हैं जो आप चाहे।"

"कोई दिक्कत नहीं है।"

"आपका नाम सर?"

"मैं आर्थर कॉनन डायल हूं। फ्रेंड्स लंदन में आपका स्वागत है।"

समाप्त

#लेखनी
#लेखनी कहानी

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10 Comments

PHOENIX

03-Dec-2021 09:25 PM

इस पर तो महागाथा लिखी जा सकती है। संवाद बहुत अच्छे लिखे है। प्रस्तुति बहेतरीन है। और शुद्ध हिंदी भाषा...इतनी खूबसूरत भाषा और शब्दों का सही चुनाव, मतलब परफेक्ट वर्डस शायद आप की तरफ से मैंने पहलीबार पढ़ी। आप को बहुत बहुत शुभकामनाएं ।

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pk123

04-Dec-2021 08:11 AM

Thanks

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Zakirhusain Abbas Chougule

03-Dec-2021 12:13 PM

Nice

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pk123

03-Dec-2021 02:51 PM

Thanks

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रतन कुमार

03-Dec-2021 11:17 AM

Behtarin kahani h

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pk123

03-Dec-2021 02:51 PM

Thanks

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