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लेखनी प्रतियोगिता -04-Dec-2021

शापित साँसें..!

पृथ्वी का प्रकृति-बिंदु आकाश में तेजी से घूम रहा था। जब वह प्रकृति-बिंदु अँधेरे अनंत आकाश में एक बहुत ही अनजान स्थान पर पहुँच गया, तो उससे पाँच बिंदु अलग हो गए - पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश! ये पंचमहाभूत एक महत्वपूर्ण चर्चा और निर्णय के लिए एक साथ आए। वे सभी पांच बिंदु ऊपर तैर रहे थे।

अग्नि हंसने लगी और उसने कहा, "यह आदमी भी कितना अजीब है! उसने पृथ्वी के अंत के बारे में एक फिल्म भी बना डाली। २०१२. लेकिन वह साल बीत गया और वैसा कुछ कभी हुआ भी नहीं। बेचारे इंसान सोचते हैं कि विज्ञान की वजह से हमने प्रकृति पर काबू पा लिया है और इंसान तय करेंगे कि प्रकृति हमें कैसे खत्म करेगी। कई किताबें, चर्चाएं, वीडियो बहसों से भरे पड़े हैं!"

पृथ्वी ने आगे कहा, "अरे नहीं! वह इस विचार से लड़ रहा है कि प्रकृति अपने साथ नष्ट हो जाएगी, क्या मूर्ख इंसान है! और कुछ विज्ञान-प्रेमी लोग यह भी सोचते हैं कि दुनिया का अंत जैसा कि वे कहते हैं एक वैज्ञानिक समीकरण के अनुसार होगा! इस बात का लोगों को गर्व है, अभिमान है! अन्य ग्रहों पर मानव जैसे जीवों ने अभी तक प्रकृति के साथ विश्वासघात नहीं किया है। इसलिये उन ग्रहों पर की प्रकृति वास्तव में भाग्यशाली है।"

वायु और जल ने कहा, "और कुछ अध्यात्मवादी अपनी मान्यताओं के अनुसार दुनिया के अंत की कल्पना कर रहे हैं !!"

आकाश ने कहा, "जल्द ही पृथ्वी पर मनुष्य को पता चल जाएगा! दुनिया किसी भी तरह से समाप्त नहीं होगी,  दुनिया उस तरह से कभी खत्म नहीं होगी जैसा उसने सोचा था, परंतु प्रकृति दुनिया को अपने अद्भुत और अभूतपूर्व तरीके से समाप्त कर देगी। भूकंप, ज्वालामुखी, बाढ़, इनमें से कुछ भी नहीं होगा। मनुष्य मरेंगे लेकिन सभी स्वाभाविक रूप से। जैसा उन्होंने प्रकृति पर अत्याचार किया वैसा अत्याचार हम उनपर नहीं करेंगे। लेकिन हम उन्हें स्वाभाविक रूप से मरने देंगे !!"

"मनुष्य कितना भोला है। वह पूरी पृथ्वी के विनाश की चिंता करता है और खुद को जहाजों में सुरक्षित होने की कल्पना करता है। क्या मूर्ख है!", सबने एक स्वर में कहा। वे फुसफुसाए और अंत में सभी ने निश्चय किया.. हां। यही अब एक उपाय है!

जब "आकाश" हँसने लगा, बादल गरजने लगे, "बारिश" "धरती" पर गिरने लगी और "हवा" चलने लगी, "बिजली" चमकने लगी। तब पृथ्वीपर इंसानों को अजीब सी घबराहट होने लगी। कोनसी ये बता पाना मुश्किल था।

सभी पांच बिंदुओं ने एक स्वर में कहा, "इंसानों, बहुत हुआ प्रकृति आपका..! बहुत हुआ अब एक दूसरे पर, जानवरों और मानवता पर अत्याचार..!" 

फिर वे पांच बिंदु एक साथ आए। वह फिर से प्रकृति का एक बिंदु बन गये और वह बिंदु तेजी से पृथ्वी की ओर आने लगा..!! "वायु" ने अपने गुणों को बदल दिया क्योंकि इसकी गुप्त रूप से चर्चा की गई थी। कल सुबह सभी मनुष्य सांस लेंगे और दुनिया का अंत शुरू हो जाएगा। पृथ्वी पर मनुष्य जाति का अंत आरंभ..!

वायु जोर-जोर से हूटिंग कर रहा था, "इंसानों..! तुम्हारा अंत वहीं से शुरू होगा जहां से तुम्हारा आरंभ होगा...!! लेकिन बाकी सभी जानवरों और पक्षियों को कुछ नहीं होगा...!!"

अगले दिन सभी मनुष्यों ने सांस ली। नई सांस !! एक अलग अजीब सांस। प्रकृति द्वारा दिए गए श्राप की सांस। मनुष्य को प्रकृति पर अत्याचार करने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने के लिए प्रकृति द्वारा दिया गया श्राप। शापित साँसें..! आज आधी रात तक जन्म लेने वाले बच्चे आखिरी होंगे। उसके बाद कोई बच्चा पैदा नहीं हो सकता। हां! वह सब कुछ जो एक पुरुष और एक महिला के शरीर में संतान को जन्म दे सकता था, भीतर से नष्ट हो गया था। वह परिवर्तन "प्रकृति" में एक नई शापित सांस द्वारा किया गया था। उस दिन केवल कुछ ही महिलाएं गर्भवती थी जो बच्चों को जन्म दे सकती थी। अब आदमी हमेशा की तरह का सेक्स कर सकता था लेकिन उससे संतान प्राप्ति नहीं हो सकती थी। पूरी दुनिया को ये बात जानने में दो-तीन महीने लग गए। 

डॉक्टरों के पास ऐसे बहुत से मामले आने लगे। उस शापित सांस के दिन के बाद दुनिया भर में खबर फैल गई। आखिरी बच्चे का जन्म १८ अगस्त को हुआ था। तब से दुनिया में कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। अब तक लगभग सभी जानते थे कि अब इतने ही मनुष्य बचे हैं! अब नए बच्चे पैदा नहीं होंगे।

इस तरह इंसानी दुनिया खत्म हो जाएगी। कुछ के लिए, यह एक आशीर्वाद था। सेक्स के माध्यम से बच्चे पैदा करना अब संभव नहीं था। इससे व्यभिचार बढ़ा। कंडोम नष्ट हुये। कुछ के लिए सेक्स का आनंद लेने की "बाधा" खत्म हो गई। विवाह की प्रथा बंद हो गई क्योंकि इस प्रकार की वंशावली अब मौजूद नहीं रहेगी। इसके विपरीत, कुछ अन्य आध्यात्मिक लोगों ने एक समूह बनाया। दुनिया भर से लोग वहां जमा हुए। वे अखंड भगवान का नामजप करने लगे।

सभी अपने-अपने धर्म के अनुसार पूजा-अर्चना करते रहे। यज्ञ हवन प्रारंभ हुआ। दुनिया भर के डॉक्टरों और आयुर्वेद के ऋषियों ने एक संयुक्त शोध शुरू किया। अमरता की दवा का। प्रयास किए गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लेकिन विज्ञापन के जरिए लोगों ने एडवांस बुकिंग कर पैसा कमाया।

विभिन्न देशों के आतंकवादीयों पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। वे लोगों को मारते रहे। दुनिया मोटे तौर पर दो प्रकार की मानसिकता में विभाजित हुई। एक ने जितना हो सके खुशी से जीने का फैसला किया, और एक और समूह जिसने दूसरों को और खुद को नष्ट करना शुरू कर दिया। जहां कुछ शत्रु देशों के संबंधों में सुधार हुआ, वहीं कुछ शत्रु देशों ने इस स्थिति में भी एक दूसरे पर हमला करना शुरू कर दिया। दुश्मन देश को सिर्फ एक ही समाधान मिल रहा था कि, दुनिया खत्म होने से पहले मेरा दुश्मन खत्म हो रहा है। कुछ देशों ने एक दूसरे के लिए वीजा और पासपोर्ट नियमों में ढील दे दी थी। मरे जाने से पहले दुनिया को देखने के लिए, उसे बिना लाइसेंस के अलग-अलग देशों की यात्रा करने के लिये मिलने लगी। कुछ अरब देशों ने मुफ्त में तेल बेचना शुरू कर दिये थे क्योंकि वाहनों का इस्तेमाल कम हो गया था। अगर लोग ही नहीं होंगे, तो कार कौन चलाएगा? ट्गाड़ियां ही नहीं चलेंगी तो पेट्रोल का क्या फायदा? 

दुनिया भर के वैज्ञानिक अपनी खोजों को गले लगाकर रोने लगे। कुछ ने इसे नष्ट कर दिया। कुछ ने हार नहीं मानी। वे खोजते रहे। ये सब देखने के बजाये कुछ लोग नासा के एक अंतरिक्ष यान में पृथ्वी पर देखने के बजाय कई लोग अंतरिक्ष में चले गए। इसी आइडिया पर फिल्म इंडस्ट्री ने फिल्में बनाना शुरू किया। लेकिन लोगों की रस का आनंद लेने की प्रवृत्ति धीरे-धीरे कम हो गई। चित्रकार और लेखक को कुछ सूझ ही नहीं रहा था। क्योंकि सब को अपना आखरी समय नज़दीक है ये पता चल चुका था। जो रह गए और जो सकारात्मक सोच वाले थे वे सेमिनार लेने लगे। लोगों को जीने की कला सिखाने लगे। फैक्ट्रियां, कंपनियां बंद पड़ गयी। अब सीखना और नौकरी पाना ज्यादा काम का नहीं रह गया। नया व्यवसाय शुरू करने का कोई मतलब नहीं था। ज्योतिषी विभिन्न तर्क लगाने लगे। हालाँकि, किसान अमीर हो गया। क्योंकि अनाज बहुत महंगा हो गया था। 

स्कूलों में शुरुआती कक्षाएं खाली जाने लगी। कक्षा I, II, III ... क्रम में बंद पड़ने लगे। छोटे बच्चे भी उस मानसिकता में विकसित होने लगे। एक साल ऐसा भी हुआ कि दुनिया में 18 साल के बच्चे नहीं बचे थे। पूरी दुनिया में बड़े बूढ़े आदमी बचे थे। बचपन खत्म हो गया था। हालाँकि, पृथ्वी पर जानवरों की संख्या हमेशा की तरह थी। कुछ वर्षों के बाद, दुनिया में जानवरों की संख्या में वृद्धि हुई। सांप, बाघ कभी-कभी सड़कों पर दिखाई देते थे। उन्होंने लोगों का शिकार करना शुरू कर दिया। पेड़ लोगों को देखकर मुस्कुराने लगे। धीरे-धीरे लोगों में से एक को यह एहसास होने लगा कि दुनिया का सबसे छोटा व्यक्ति कौन होगा? वह उन सभी में अंतिम आदमी होगा। आखिरी आदमी जो आखिरकार अपनी आखिरी शापित सांस इस दुनिया से छोड़ देगा?

आखिर में दो रह गए। एक आदमी एक, दोनों में पांच साल का अंतर। यह जानने से क्या लाभ होगा कि वे किस देश और उम्र के थे? अंत में, मानव जाति अपनी मूल स्थिति में वापस आ गई। एक औरत एक आदमी। दोनों ने निश्चय किया कि प्रकृति से माफ़ी मांगते है..! और संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते है। हे प्रकृति के देवता! हम वादा करते हैं कि हम प्रकृति पर अत्याचार नहीं करेंगे। कृपया! कृपया! उन्होंने प्रार्थना करने के लिए अपनी आँखें बंद कर लीं। युग युग बीत गये। वे मन लगाकर प्रार्थना कर रहे थे। उन्होंने आँखें खोलीं। वे जवान थे, उनके सामने पेड़ पर एक सेब था। वो अचानक नीचे गिर पड़ा। 

दोनों ने एक दूसरे को देखा और हंस पड़े। वो दोनों तय करना चाहते थे - फल खाएं या नहीं। आपने जो देखा वह भविष्य का एक भ्रम था, या यह वास्तव में सब हो रहा था? फल खाने से पहले वह ऐसे ही सोचते रहे। आखिर में प्रकृति का आशीर्वाद समझ कर उन्होंने वह फल खा लिया और इस प्रकार दुनिया में इंसान वापस आगये। 

अब हमें यह तय करना है कि अपने भी हालत ऐसे हो या नहीं..! इसलिये प्रकृति पर प्रेम करो।

समाप्त

#लेखनी
#लेखनी कहानी सफर

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8 Comments

Zakirhusain Abbas Chougule

16-Dec-2021 11:00 PM

Nice

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Shrishti pandey

06-Dec-2021 11:44 PM

Nice

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pk123

05-Dec-2021 10:07 AM

Thanks

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