खोजी दिमाग (आविष्कार या विनाश)लेखनी प्रतियोगिता -14-Dec-2021
खोजी दिमाग (आविष्कार यह विनाश)
""किसी सपने के सच होने की संभावना ही जीवन को रोचक बना देती है।""
ना जाने यह किसने कहा था पर .....यह वाक्य मुझे हर दिन सपने देखने और उसे सच करने के लिए प्रेरित कर रहा था । मेरी यह जिज्ञासा घर में उपलब्ध हर सामान के टुकड़े-टुकड़े कर रही थी। पहले छोटे-छोटे खिलौने खासकर वह ट्रेन.... रिमोट से चलने वाली.., एरोप्लेन ,स्ट्रीमर ,कार । धीरे धीरे मोबाइल फ्रिज टीवी।
"" मां मुझे कतई साइंटिस्ट नहीं समझती थी। उनकी घूरती आंखें देख मैं कमरे में ही दुबक जाता।
पापा मुझे खोजी साइंटिस्ट कहने लगे थे। धीरे-धीरे में बड़ा हो रहा था और.... मेरा खोजी दिमाग और बडा।
प्लेन पर तो सभी उड़ चुके थे और भारी-भरकम रॉकेट से भी ब्रह्मांड के अन्य ग्रहों पर विशेषकर चंद्र और मंगल ग्रह पर जा चुके थे। पर..... मेरी कल्पना तो कुछ और थी।
"""मैं ट्रेन को चांद पर ले जाना चाहता था। वह भी... अपने सभी मित्रों और परिवार.... लगभग चार पांच सौ लोगों के साथ । ना किसी को सूट पहनने की जरूरत और ना ऑक्सीजन मास्क की।
मेरे इस सपने पर हंसी आ गई सबको।।।😊
पृथ्वी पर यह संभावनाएं बढ़ती ही जा रही थी... ज्वालामुखीयों के फूटने से निकलने वाले लावे और धूल के गुबार से सूर्य के प्रकाश के अवरोध होने की । जिससे सूर्य की किरणें धरती पर नहीं पहुंच पाएंगे और ताप के अभाव में धरती पर हिम युग की शुरुआत हो सकती है।
या..…....
परमाणु विध्वंस की भी संभावना थी। जिसका एक उदाहरण बोस्टन शहर था और अन्य परमाणु आविष्कार संस्थान को अब सतर्क रहने की आवश्यकता थी । यदि एक परमाणु संयंत्र में विस्फोट से उपजे रेडियोधर्मी विकिरण से पूरी पृथ्वी उजड़ गई तो क्या होगा । जंगल, नदियां और समुद्री के जीव जंतुओं पर कोई बुरा प्रभाव हुआ तो।
अवशिष्ट पदार्थों के दूषित जल में मिल जाने के बाद वह पानी पीने से वो दानव रूप में ही आ जाएंगे तब क्या होगा ।
"""आवश्यकता आविष्कार की जननी है तो आविष्कार विनाश भी जनक हो सकता है।""
अपने प्रयोग के साथ-साथ मैं इसरो में साइंटिस्ट बन गया और अपने इस प्रोजेक्ट के बारे में वहां सभी को कन्वेंस करने लगा । उन्हें यह प्रोजेक्ट पसंद आया।
कुछ समय पूर्व ही अपने सहयोगियों के साथ मिशन चंद्रग्रह के दौरान मिस ईवा ...जिन्होंने.... पौध संकरण कर विकसित प्रजाति पर काम किया था ।चंद्रमा पर संकरण की पौध लगा दी गई थी। परंतु वापस लौटते वक्त उस यान का एक हिस्सा जिसमें ईवा थी... वह हिस्सा टूटकर ब्रह्मांड में विलीन हो गया था पृथ्वी पर आते हुए ।
वह मेरी दसवीं क्लास तक की सहपाठी रही थी और वह वनस्पति विज्ञान की छात्रा थी।
अपने-अपने कार्यों में व्यस्त रहने की वजह से हमारा ज्यादा संपर्क नहीं हो पा रहा था । पर... हम एक दूसरे के दिल के बहुत करीब थे। ❤️
कुछ समय बाद बुलेट ट्रेन प्लस रॉकेट की थ्योरी के आधार पर काम करते हुए हमने एक ""फ्लाइंग ट्रेन""" बनाने में सफलता हासिल कर ली थी।
हमारी टीम में प्रो. अरविंद,प्रो. नवल किशोर ,प्रो.जयंत वाशी, प्रो.विष्णु प्रसाद, प्रो.केतन आनंद, अपने अन्य पुरुष और महिला मित्र एवं हमारे परिवार, कुल मिलाकर 300 यात्री उस ट्रेन में बैठे । चंद्रमा की ओर रवाना हुए। सभी को 1 महीने की ट्रेनिंग दी गई थी । जिससे स्वयं को तैयार कर सके हर परिस्थितियों के लिए।
फ्लाइंग ट्रेन टेक ऑन किया और रॉकेट की स्पीड से आसमान को चीरते हुए निकल पड़ी। चंद्रमा तक पहुंचते हुए गति धीमी होती जा रही थी।
प्रो.विष्णु प्रसाद की नन्ही 5 वर्ष की बिटिया ने कहा ....अरे ...पापा ...देखो वहां.….
वह ग्रीन ग्रीन दिख रहा है।
उन्होंने देखा सचमुच हरियाली थी चांद पर।
फ्लाइंग ट्रेन की लैंडिंग हो चुकी थी चंद्र ग्रह पर।
सभी के मन में हर्षोल्लास था।
जैसे ही सब उतरे आश्चर्यचकित रह गए। चंद्र ग्रह के एक हिस्से में जहां पादप कोशिकाओं का रोपण किया गया था वहां का एक हिस्सा हरा भरा हो चुका था। वृक्षों पर कई तरह के फल लगे हुए थे।
प्रो. नवल का बेटे ने फल को खाने की इच्छा जताई।
पर..... उसे खाने से रोक दिया गया। पता नहीं कैसा होगा वह फल । अपने साथ लाए हुए कुछ चिड़िया, तोता ,कबूतर और गाय और कुत्ता......उनमें से चिड़िया को एक फल खाने के लिए दिया गया। कुछ घंटे बाद भी चिड़िया ठीक थी । तब सभी ने फल खाए।
अब सब चंद्रमा पर घूम घूम कर देख रहे थे। आम के वृक्ष पर आम के साथ ही जामुन के फल भी लगे थे ।टमाटर और सेब एक ही पौधे में लगे थे। संतरा और मोसंबी एक साथ एक वृक्ष पर। ऐसे ही अनेक वृक्ष और पौधे ,पौध के संकरण द्वारा वहां की धरती पर उपजे थे।
चूंकी सब ऑक्सीजन युक्त थे। तो पर्याप्त ऑक्सीजन से चंद्रमा में जीवन संभव हो रहा था।
यह सब साइंटिस्ट ईवा का ही कमाल था।
हम सब वहां विचरण कर ही रहे थे कि अचानक एक जगह मैंने देखा कि कोई बैठा था । मैंने सोचा टीम में से ही कोई है ।परंतु...
यह क्या ! ....यह तो मिस ईवा है!!!!!
मैं खुशी से चिल्ला उठा... ईवा.....
........ ईवा जिंदा है।
सभी दौड़ के आए यह तो चमत्कार हो गया .....मिस ईवा जिंदा है!!!!!
ईवा ने मेरी आवाज सुनी तो मेरी ओर देखा।
वह पत्तों के कपड़े पहने हुए थी।
वह दौड़ के मेरे पास आई ......
नील...... तुम हो..... तुम.... आ गए
"""मुझे पता था...... कोई ना कोई जरूर आएगा......
"""" मैं यहां अकेली थी...... कितने वर्षों से....
उसकी आंखों से आंसुओं की धार बह निकली।।
ओह ईवा........!
""हम सब ने तो सोच लिया था कि .....अब तुम नहीं हो.. दुनिया में.... तुम... ब्रह्मांड में लीन हो गई हो पर....
"""यह तो चमत्कार ही है।"""""
हम सभी ने 1 वर्ष तक चंद्रमा पर निवास किया। यहां कुछ निर्माण कार्य किए । वृक्षों की लकड़ियों से घर बनाए । जरूरत की चीजों का आविष्कार किया और उत्खनन कर खोज भी की। कई सारी जानकारियां जुटाई।
अब हमें पृथ्वी की याद आने लगी थी।
"""पृथ्वी पर कांटेक्ट करने की कोशिश की परंतु संपर्क नहीं हो पा रहा था।
1 माह बाद फिर से संपर्क करने की कोशिश की गई हमारे द्वारा।।
इस बार संपर्क हो गया हमने उत्साह के साथ उन्हें सूचित किया।"""" मिशन सक्सेसफुल रहा और कई जानकारियां भी हमारे द्वारा प्राप्त कर ली गई है और अब हम पृथ्वी पर लौटना चाहते हैं।""
परंतु..... यह क्या ......पृथ्वी से संदेश प्रसारित हो रहा था।
"""यहां पृथ्वी पर वायरस पर शोध कार्य चल रहा था पर...... अब आप पृथ्वी पर ना लौटे .....उस खतरनाक वायरस ने हमला कर दिया है और परमाणु युद्ध भी छिड़ गया है। परमाणु विस्फोट हो रहे हैं । पृथ्वी पर त्राहि-त्राहि मची है। विषैली गैसों से सब मर रहे हैं। वायुमंडल प्रदूषित हो चुका है। पेड़ पौधे नष्ट हो गए हैं ।रेडियोधर्मी किरणों और धुएं के गुबार से सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध हो गया है। शायद अब हिम युग की शुरुआत हो सकती है।
शैलजा ❣️
Dipanshi singh
16-Dec-2021 05:11 PM
Very nice 👌
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Pallavi
15-Dec-2021 10:04 PM
Nice
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Priyanka Rani
15-Dec-2021 09:43 PM
Wow exellent
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