Sahil writer

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फ़साने



मुझे  देख कर अर्श और जमीं भी रो रहे है 
दर्द ऐ ज़िन्दगी के वो भी मुझसे फ़साने सुन रहे है 

वो दाग उम्र भर का मुझे पर लगा कर मुँह फेर
कर यूँ रूठकर दुनियां से रुक्सत हो रहे हे 

मै बेबस सी लाचार सी खड़ी उनको आँखो मे अश्कों 
को भर भारी मन से जाते हुए देख रही हुँ 

‌मैंने सोचा ना था कभी ऐसा भी आएगा एक दिन 
मुझे उनसे यूँ ऐसा तरह जुदाई सहनी पड़ेगी 

सपने बिखरे हुए से  दिल मेरा टूटता जा रहा है 
रूह से जान देखो मेरी कैसे निकलती हुई जा रही है 


साहिल राइटर....





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