इल्जाम
कल उसकी बातो ने दिल को बड़ा दुखाया था ll
अश्कों के समंदर को भी पास लाया था ll
वो तो बस बोले ही जा रहा था ll
ना सुनी मेरी एक भी बस अपनी ही कहे जा रहा था ll
मै अपनी सफाइयां दिए जा रही थी ll
वो तो बस उनको झुठलाया जा रहा था ll
दिल मेरा बिचारा उसके लगाए हुए इल्ज़ामो को सहे जा रहा था ll
ना जाने वो मुझे किसी बात की सजा दिए जा रहा था ll
सारे इन्जामो की गठरी मेरे ही सर फोड़े जा रहा था ll
एक पल के लिए नहीं सोचा मेरे दिल पर क्या गुजर रही थी ll
सारे कसमे वादे तोड़ कर वो पीछे अपने मेरी लाश छोड़ कर जा रहा था ll
साहिल राइटर....
Seema Priyadarshini sahay
30-Nov-2021 06:40 PM
बेहतरीन पंक्तियां
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