चेकमेट.... लेखनी प्रतियोगिता -22-Dec-2021
चेकमेट
"रवि, आज वापस दिखा वो मुझे।" वाणी की आवाज कांप रही थी, फोन पर भी उसकी मनोदशा साफ़ पता चल रही थी।
"डोन्ट वरी, तुमने दवाईयाँ ली क्या आज..?" रवि ने ध्यान से पूछा।
"बारबार क्या पूछते हो दवाईयाँ ली क्या..!, आप सभी मेरी बात से सहमत क्यों नहीं हैं, वह वास्तव में है, और एक दिन वह मुझे मार डालेगा।"
"शांत हो जाओ वाणी, मैं डॉक्टर राणे को फ़ोन करता हूँ, तुम दवाईयाँ लो पहले, तब तक मैं डॉ. को लेकर आता हूँ।"
"हाँ.. हाँ... लेती हूँ दवाईयाँ, दवाईयाँ खिलाकर मार डालो मुझे।" जोर से चिल्लाकर वाणी ने जवाब दिया और पीछे से कुछ तो पटकने की आवाज आयी।
"हॅलो, ए वाणी..."
लेकिन कोई जवाब नहीं, सिर्फ कुछ तो फूटने की और पटकने की आवाजें आती रही। रवि ने तुरंत फ़ोन कट किया।
"मुझे आज जल्दी जाना है, मेरे घर पर थोड़ा प्रॉब्लम हुआ है, बॉस।"
"वापस वाईफ़ की कंडीशन डाऊन क्या..? रवि पिछले एक साल में आपके साथ ऐसा कई बार हो चुका है, तुम उन्हें एक अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखा देते..?"
"ट्रीटमेंट शुरू है सर, डॉ. का कहना है वाणी जल्द ही ठीक हो जाएगी।"
"ओके, आप जा सकते हो।"
*********
"डॉ., सेम प्रॉब्लम वापस हुआ है, प्लीज आप आ सकते हो क्या..?" फ़ोनपर हॅलो भी नहीं कहा उसने सीधा सवाल किया।
"....... "
"यस, में आ ही रहा हूँ कार लेकर, डॉ. कुलकर्णी को बताये क्या..?"
"....... "
"ओके, मैं आ रहा हूँ।"
*********
"रवि, जरा ध्यान से मरीज व्हायलेंट है, जरा देखकर।"
"डोन्ट वरी डॉ. चाहे जैसी भी हो पत्नी है वो मेरी, मुझे चोट नहीं पहुँचायेगी।"
"सौभाग्य से, दरवाजे के अंदर की कुंडी लगायी नहीं गई थी, कम से कम हम अंदर जा सकते हैं।"
"डॉ. कुलकर्णी ने कहा है, ऐसे में मरीज खुद को चोट पहुँचा देते है।" डॉक्टर राणे ने कहा।
"बिल्कुल सही"
"ओह्ह माँss.."
"सावधानी से रवि, मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दी थी।"
"आगये तुम वापस? अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी, अंदर आओ तुम्हें फाड़ देती हूँ।" अंदर से एक भयानक आवाज आयी।
"ए वाणी, मैं हूँ... देखो डॉक्टर भी आये हैं। हम तुम्हें उससे बचाने के लिये ही आये है। साइड में रखो वो चाक़ू और ये क्या कितनी बड़ी चोट की है तुमने अपने कलाई पर।"
"उसने..., उसने मुझे फिर से मारने की कोशिश की, उसने ही मेरे हाथ की नस काट दी," उसने कर्कश आवाज में कहा।
"अब मैं आगया हूँ ना, अब वो कुछ नहीं कर पायेगा।"
"कौन तू..?"
"मैं रवि, तुम्हारा रवि..!"
"रवि ss, रवि ss वो देख ना वापस आऊंगा कहकर खिड़की से भाग गया।"
"यह कैसे संभव है, वाणी, खिड़की पर ग्रिल लगी हुयी हैं, और मान लो कि उसने उसके स्क्रू ढ़ीले कर लिये? फिर भी हम नौवीं मंजिल पर रहते हैं, एक पल में मर जाएगा कूदकर, कोई नहीं है वहाँ, चलो पहले उस चाकू को साईड में फेंक दो।"
"आओ डॉक्टर, मैंने उसे पकड़ लिया है। अब किसी से डर नहीं है।"
"थॅंक गॉड रवि, आज का अटॅक जोरदार था। हमें भी धोका था, पहले इन्हें इंजेक्शन देता हूँ, फिर तुम्हारे माथेपर बैंडेज लगता हूँ।"
"डोन्ट वरी डॉक्टर, चोट ज्यादा गहरी नहीं है, और यह देखो रुमाल से खून का बहाव रोक लिया हूँ।"
"बड़ी कैसे नहीं है भाई, फ्राईंग पॅन फेंक कर मारा है, टांके लगने की संभावना है।"
"चलो पहले उसे बिस्तर पर लिटा दो, उसे सोने दो।"
"रवि, जरा सावधान रहो, या फिर जैसा डॉ. कुलकर्णी कहते हैं उन्हें ऍडमिट कराओ।"
"डॉक्टर, वाणी पागल नहीं है, बस थोड़ा डिस्टर्ब है इतना ही...।"
"तुम्हारा उसके प्रति प्यार बोल रहा है।"
*********
"डॉ. कुलकर्णी किस वजह से यह हो रहा है..?"
"इसे हॅलेस्युनेशन्स कहते है, सरल भाषा में भ्रम, स्किज़ोफ्रेनिक मामलों में बहुत आम है, दुर्भाग्य से आपकी श्रीमती का स्टेज बहुत आगे निकल चूका है, अगर आप इसे अभी ऍडमिट कर देंगे तो शायद कुछ हो सकता है।"
"लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है?"
"दिमाग का काम बहुत जटिल होता है, कभी-कभी कुछ गलत हो जाता है, जो हिस्सा काम करने वाला होता है वह काम नहीं करता और फिर कुछ ऐसा होता है।"
"लेकिन उसे होनेवाले भ्रम? इसमें कोई तो सच्चाई होगी ना?"
"देखो, रवि, किसी को सींग और पूँछवाला शैतान दिखना इसमें क्या कोई सच्चाई होगी?"
"लेकिन उस पर समय-समय पर होनेवाले हमले? आपने उन घावों को देखा है, उन घावों पर तो डॉ. राणे ने कितनी बार ड्रेसिंग की है?"
"उन्होंने इसे स्वयं किया, उन्हें जो डर लगा, वह उनके भीतर से आया, उस शैतान का जन्म उनके दिमाग की उपज से हुआ है, और उसका अस्तित्व पूरी दुनिया ने मान्य करने के लिए किया जा रहा यह एक संघर्ष है।"
"लेकिन ऐसा होने का कोई तो कारण होगा ही ना, और उसे होनेवाले भ्रम? ...."
"लगातार तनाव, आनुवंशिकता, या कभी-कभी बाहरी घटक से भी होता है, जैसे नींद की गोलियाँ।"
"लेकिन वाणी के मामले में इनमें से कुछ भी सच नहीं है। हमारा जीवन कितना शानदार था। जैसा कि आप कहते हैं, उसे कभी किसी दवा की आवश्यकता नहीं थी।"
"इसलिए मैंने कहा रवि, की मन बहुत जटिल है। आपके मामले में, बाहरी विषाक्त पदार्थों का कोई संबंध नहीं है। सभी रिपोर्ट नॉर्मल हैं, हमारे प्रयास जारी हैं, लेकिन मैं आपको जल्द से जल्द इन्हें ऍडमिट करने की सलाह दूंगा।"
"कुछ दिन रुको, डॉक्टर?"
"जैसी तुम्हारी मर्जी।"
*********
"हॅलो, मिस्टर रवि..? इंस्पेक्टर पवार बोल रहा हूँ, एक बॅड न्यूज है, तुम्हारी पत्नी ने तुम्हारे फ्लैट की खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली है।"
"नहीं, आप गलत समझ रहे होंगे इंस्पेक्टर, मेरी पत्नी ऊंचाइयों से डरती है, और यह संभव नहीं है क्यूँकि हमने खिड़कियों पर ग्रिल्स लगाये हैं।"
"उसी ग्रिल्स को निकालकर वो कूद गयी हैं। मैंने अपनी जीप भेजी है जल्द से जल्द निकल आओ।"
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"रवि, मैं अभी भी कह रहा हूँ की वापस एकबार ठंडे दिमाग से सोच लो। यह तुम्हारे लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है, लेकिन तुम्हें नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं करना चाहिए।"
"सर, मेरे लिए वाणी ही सब कुछ थी, अब वो ही नहीं तो मेरे जीने का कोई मतलब ही नहीं, मैं सच में यह सब छोड़कर दूर जाना चाहता हूँ।"
"मैं सुझाव दूंगा कि आप कुछ दिनों की छुट्टी लें, कहीं घूम आओ, इससे बाहर निकलने की कोशिश करो और फिर से शामिल हों। यदि संभव हो तो मैं छुट्टी की व्यवस्था करता हूँ" रवि के बॉस ने कहा।
"नहीं सर, सही में ऊब चूका हूँ अब जिंदगी से।"
"मैं आप जैसे एम्प्लॉयी को खोना नहीं चाहता, इसलिए मैं तुम्हें फिर से सोचने की सलाह देता हूँ, चाहिए तो दो दिन लो सोचने के लिये। तब तक मैं इस इस्तीफे को आगे नहीं बढ़ाऊंगा।"
"ठीक है सर, लेकिन दो दिन बाद भी मेरा फैसला वही रहेगा।"
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"रवि, यह तो महज एक औपचारिकता है। हमें आपके पड़ोसियों से जानकारी मिली कि आपके और आपकी पत्नी के बीच संबंध कितने अच्छे थे, उनकी बीमारी के वक़्त आपने उनका कितने ख़याल रखा, उन्हें दिए गए उपचारों की भी डॉक्टरों ने रिपोर्ट दी है, जिन्होंने निष्कर्ष निकाला कि संक्षिप्त घटना एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी।"
"मैंने इस दुर्भाग्य में सब कुछ खो दिया।"
"मुझे पता है, मैं आपका दुख साझा करता हूँ, जिज्ञासावश आपसे मेरे बस दो प्रश्न है।"
"पूछो, यह तुम्हारा काम है।"
"एक... आपने अपनी पत्नी को ऍडमीट क्यों नहीं किया जबकि डॉ. कुलकर्णी लगातार आपको सुझाव दे रहे थे..?"
"सर, वहाँ मरीज़ के क्या हाल होते है, वो बंद कमरे, वो रस्सियाँ, बेल्ट, मुझमें वाणी को वहाँ खुदसे झोंकने हिम्मत नहीं हुई।"
"हाँ, यह सही है, मेरा मतलब है, उनके प्रति आपका प्यार दीखता है। अब आखिरी सवाल, उनकी मृत्यु से पहले आखिरी झटके के दौरान, आपने उन्हें खिड़की की ग्रिल और नौवीं मंजिल से अवगत कराया था ऐसा डॉ. राणे ने कहा।"
"शायद मैंने बात की हो सकती है, लेकिन यह उसे आश्वस्त करने के लिए था कि हम सुरक्षित हैं, और अचानक हुई घटना की स्थिति में कोई भी व्यक्ति ऐसा ही कहेगा।"
"यह बात तो सच है तुम्हारी, लेकिन मेरी जिज्ञासा मुझे चुप बैठने नहीं दे रही थी? वैसे भी, कानूनी काम खत्म हो गया है, अब आप जा सकते हैं।"
"थँक्स इंस्पेक्टर।"
*********
"हॅलो जय, आपने कैसे कॉल किया..? मैं आपको कॉल करने वाला था।"
"....."
"हाँ, दुर्भाग्य से यह सच है, दो महीने हो गए हैं और मैं इससे अबतक उबर नहीं पाया हूँ, इस समय मेरी तबीयत ठीक नहीं है, मैं अगले हफ्ते स्थायी रूप से अमेरिका जा रहा हूँ, इस रविवार को मिलते हैं?"
"....."
"शुअर, उसी पुरानी जगह, चल बाय।"
"हाय जय, सॉरी मुझे थोड़ी देर हो गई, लेकिन मुझे यह तय करने में थोड़ा समय लगा कि जाते-जाते तुम्हें क्या गिफ़्ट दूँ।"
"इट्स ओके यार, गिफ्ट कोई जरूरत नहीं थी।"
"आय नो, लेकिन अब मैं वास्तव में यहां सभी से संपर्क तोड़ने जा रहा हूँ, इसलिए यह हमारी अंतिम मुलाक़ात है।"
"मुझे इस की दुर्भाग्यपूर्ण जानकारी बहुत देर बाद मिली यार, तुम्हें तो पता है कि मैं यहाँ से बैंगलोर गया था और किसी से भी ज्यादा संपर्क में नहीं था।"
"मुझे सच में तुम्हारी जरूरत थी यार, आखिर में हम तीन करीबी दोस्त जो थे, ये तो बाद की बात है की वाणी को मुझसे प्यार हो गया और हमने शादी कर ली।"
"हाँ, उस बात की तो हमेशा जेलसी थी मेरे मन में।"
"अभी वो जेलसी भी ख़त्म कर ड़ाल।"
"अरे यार, बस क्या अब ऐसा बोलेगा..!"
"जय, एक मायने में, हमारी यह आखिरी मुलाकात है, इसलिए मैं तुम्हारे लिए एक खास तोहफा लेकर आया हूँ, मुझे पता है कि वाणी के बारें में तुम्हारें मन में भी एक सॉफ्ट कॉर्नर था, इसलिए मैं ख़ास चुनकर तुम्हें ये गिफ़्ट दे रहा हूँ।"
"थँक्स यार, खोलकर देखु क्या तुरंत।"
"प्लीज.."
"रुकोss... मिस्टर जय.." एक भारीभरकम आवाज आयी।
"ओह्ह आप..!"
"मैं इंस्पेक्टर पवार, पहले उस बॉक्स को निचे रखो।"
"ओके.. ओके सर... लेकिन इतना क्या...."
"पहले वो बॉक्स निचे रखो, अगर आपने उसे खोल दिया तो जान से जाओगे।"
"ओहह माय गॉड..."
"हवालदार पकड़ो रवि को।"
"फॉर व्हॉट?"
"मि. रवि, मैं तुम्हें तुम्हारी पत्नी की हत्या के लिए और जय की हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार करता हूँ।"
"असंभव, आपको कुछ ग़लतफ़हमी हो रही है, इंस्पेक्टर। वो उसे मारना संभव नहीं है। वह उससे कितना प्यार भी करता है।" जय ने कहा।
"प्यार हुआ करता था... हलकट, मतलबी आदमी, सही में हुआ करता था। लेकिन तब तक नहीं जब तक मुझे तुम्हारे बारें में पता नहीं चला।" रवि ने कहा।
"....." जय।
"हाँ यह सच है, शादी के दो साल बाद मुझे पता चला कि तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो, सिर्फ इसलिये की तुम्हें घर से अनुमति नहीं मिल सकती, इसलिए वाणी ने मुझसे शादी कर ली, और यह सिर्फ मेरी आँखों में धूल झोंकने के लिए था। उसने मुझसे सिर्फ प्यार करने का नाटक किया और तुमने अपने प्रेम संबंध को अंदर से जारी रखा।"
"अरे लेकिन..."
"मुझे यह कैसे पता चला सिर्फ इतना ही ना..? आपका पुराना प्रेम पत्र, जिसमें सभी रसपूर्ण विवरण हैं, और उसमें तुमने वाणी को मुझसे शादी करने की सलाह दी थी, और इन दिनों, गुप्त चैट, भले ही आप दोनों ने एक नया खाता खोला हो, लेकिन साझा की गई तस्वीरें आपकी हैं, जब मुझे पहली बार तुम्हारा पत्र मिला तो मुझे संदेह हुआ, इसलिए मैंने वाणी का लैपटॉप हैक कर लिया और तुम्हारे बारे में सब पता लगा लिया।" रवि।
"और इसीलिए तुमने उसे मार डाला, है ना मिस्टर रवि?" पवार सा'ब।
"हाँ, पर तुम्हें कैसे पता चला?"
"कैसा है मिस्टर रवि, अगर मेरे मन में कोई सवाल आता है, तो मैं तब तक चुप नहीं बैठता जब तक मुझे उसका जवाब न मिल जाए। आपके दुर्भाग्य, मेरे मन में दो सवाल आये, और उत्तर प्राप्त करते समय, मुझे आपकी शिक्षा और शौक के बारे में पता चला, संयोग से आपका शोध पत्र भी हाथ में आ गया, फिर जय और एक बार सारी कड़ियाँ जुड़ गईं, फिर हमने बस आप पर नज़र रखी, मुझे लगता है कि अब आप सब कुछ स्पष्ट रूप से बता सकते हैं।"
"हाँ, आप सही हैं। हालांकि मैं सेल्स डिपार्टमेंट में काम करता हूं, लेकिन मैं बायोलॉजी में गोल्ड मेडलिस्ट हूँ, और मैंने पौधों और उनके गुणों का गहन अध्ययन किया है। मैंने धतूरा के पौधे के विभिन्न भागों के गुणों पर एक शोध प्रबंध लिखा था।"
"और.. उस शोध के आधार पर, आपने अपनी पत्नी को जहर दिया।"
" ओहह माय गॉड, वाणी को जहर..? और उसकी बीमारी..??" जय ने चौंककर पूछा।
"हाँ, मिस्टर जय, उसकी बीमारी उसी जहर का नतीजा थी, धतूरा के विशिष्ट भागों के अंश को उनकी पत्नी के मेकअप किट में मिलाया जाने लगा, मेन चाल यह है कि एक बार जब रसायन त्वचा के माध्यम से अवशोषित हो जाता है, तो यह मस्तिष्क के रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है और उसके सिग्नल्स में गड़बड़ी पैदा करता है। लेकिन खून में इसका कोई निशान नहीं होता, धीरे-धीरे व्यक्ति को लगने लगता है, वह व्यक्ति घंटों के लिए एक तरह की कृत्रिम निद्रावस्था में चला गया है, और तभी उसके दिमाग में इन्होंने शैतान का जन्म किया। आपने इस शैतान को कहाँ देखा है जिसके सिर पर सींग हैं और पूँछ वाला गंजा सिर?"
"ओनीडा टिव्ही..... "
"करेक्ट, जब मेकअप सामग्री में जहर पाया गया तो सब कुछ साफ हो गया, और उसी आखरी झटके के वक़्त इसने आत्महत्या करने का उन्हें तरीका भी बताया, और मेरा अंदाजा सच साबित हुआ, श्रीमती वाणी ने वैसे ही आत्महत्या कर ली।" पवार सा'ब ने कहा।
"ओहह शीट..." जय।
"कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, अब आपका नंबर था लेकिन चूंकि आपके लिए स्लो पॉयझनिंग संभव नहीं था, इसलिए आपके लिए एक जाहिल उपाय का चुनाव किया गया था, आपको दिए गए बॉक्स में स्प्रिंग की सहायता से एक सुई डाली गयी है, ढक्कन खोलते ही आपको वो चुभ जाती और एक मिनट बाद ही दिल का दौरा पड़ने से आपकी मौत हो जाती। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा गया होता कि मौत दिल को रक्त की आपूर्ति में रुकावट के कारण हुई थी।" पवार सा'ब ने आगे कहा।
" ओहह शीट, आपको यह सब...."
"वो क्या है ना मिस्टर रवि, कानून के हाथ थोड़े लंबे होते हैं और नई तकनीक ने भी नजर तेज कर दी है, आपके घर का हर एक कोना हिडन कैमरों से घिरा है, हमने आपको ये उपहार बनाते हुए देखा है, सो सबूत तैयार हैं, गवाह तैयार हैं, इसलिए बेहतर है कि आप अपना गुनाह कबूल कर लें।"
'हाँ, हाँ, हाँ, मैं सहमत हूँ की मैंने ही किया है यह सब। मैं यह तनाव नहीं चाहता था, वाणी ने कभी भी कहा होता की मैं तुम्हें छोड़कर जय के पास जा रही हूँ तो मान लेता मैं उसकी बात, लेकिन झूठा प्यार का दिखावा कर के छुपछुपकर जो इनका चल रहा था, वो मुझसे सहन नहीं हुआ और कर दिया मैंने खून।"
"हवालदार ले चलो इसे।"
"थँक्स इंस्पेक्टर, आपने आज मेरी जान बचाई, इस मामले में जरूरत पड़ने पर मैं गवाही देने आऊंगा।" जय ने पवार सा'ब का अभिवादन किया।
"जरूरत तो जरूर पड़ेगी, क्यूँकि इस हत्याकांड के लिए आप भी थोड़े से जिम्मेदार हैं, लेकिन किसी विवाहित महिला से प्रेम संबंध रखना कानून के तहत अपराध नहीं है, जब तक कि शिकायत न हो, इसलिये तुम्हें बक्श रहा हूँ।"
"सॉरी सर ये तो बहुत पुरानी बात थी।"
*********
"मूर्ख लोग..सचमुच आज दो अधिक पेग्स ज्यादा ले लेते हैं, एक अपनी बुद्धि के लिए और एक अपने स्किल्स के लिए, एक वाणी के हस्ताक्षर कॉपी करना और दूसरी हैकिंग, कितना आसान था वाणी का लैपटॉप हैक करना... साली वाणी, बहुत प्यार किया उसे लेकिन वो हरामज़ादी चली गयी रवि के साथ, उसको मारने में बहुत बुरा लगा लेकिन.... तीसरा भी एक पेग ले लूँ क्या..? अपने नसीब के लिये, अगर मैंने आज वो बक्सा खोला होता तो???" मन ही मन बोलते हुए भी जय के शरीर में सिरहन दौड़ गयी।
समाप्त
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#लेखनी कहानी सफर
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© दत्ता उतेकर
Sonia Jadhav
24-Dec-2021 11:44 AM
👍👍
Reply
Shrishti pandey
23-Dec-2021 08:38 AM
Nice one
Reply
Abhinav ji
22-Dec-2021 11:53 PM
वाह बहुत ही बढ़िया सस्पेंस रहा है, कहानी तो शानदार है
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