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कुछ यादों की डायरी : यादें अनकही सी!

यादें कुछ अनकही सी...!



सच है डायरी कि 2021 भी बहुत सी अच्छी बुरी खट्टी मीठी यादों से झोली भर गया है। मगर जैसा कि तुम जानती हो, मुझे केवल अच्छी यादों को सहेजना है, कुछ यादें जिनमें खुशियां हो, कुछ जिनमें मेरा बचपना और कुछ जिनमें मैंने सीखा है।

यादों की ये झोली बस अनकही सी रह जाती है। तुम्हें तो यह जानकर भी ताज्जुब होगा कि मैं हिंदी महीनों को मानने वाला हूँ, मतलब अंग्रेजी महीने रोज के प्रयोग में तो हैं परंतु हर कार्य हिंदी महीने के अनुसार ही होता है। इसलिए मुझे ऐसे ही साल बदलने की कोई खास खुशी या गम नहीं है! 

वैसे भी जैसा कि सर्वविदित है कि प्रत्येक व्यक्ति, वस्तु एवं स्थान अपने स्वभावानुसार बदलते ही रहता है, तो बदलाव को स्वीकार कर उसके साथ मुस्कुराने में ही असली खुशी है।

वैसे भी इस साल ने मुझे नायाब तोहफे दिए हैं, हीरे मिले हैं मुझे मेरी यादों की झोली में! मैंने कई तरह के अपने खुद के स्टीरियोटाइप्स तोड़े, खुद को पॉजिटिव रखना और हर हाल में मुस्कुराना सीखा। यादों की ये अनकही कहानी अगर शुरू से शुरू करूँ तो कुछ यूं समझ लो जैसे रात से शुरू हुई थी कहानी, अब सूरज निकल चुका है।

मतलब यूँ समझो कि खुशियां खुद चलकर आयी हैं, हाँ प्रॉब्लम्स अब भी शायद उतनी या उससे ज्यादा ही हैं परंतु अब इनकी फिकर किसे हैं। इस साल मैंने "विस्तार" और "प्रेमम" जैसी दो कहानियां भी लिखी, जो कि मेरे जैसे महाआलसी के लिए बहुत है। नज़राना इश्क़ का भी मेरा अलग टेक रहा पर हां जैसा प्यार मुझे रक्षक और महारक्षक में नौसिखिया होते हुए भी मिला वैसा मैं अब हासिल नहीं कर पा रहा, पर इसका कोई अफसोस नहीं है। मुझे यकीन है लोग एक दिन अलग टेस्ट की कहानियां पढ़ना जरूर पसंद करेंगे। वैसे भी मैं कोई राइटर थोड़े हूँ।


कुछ मिलाकर अब यूँ कहूँ तो कुछ ऐसा डायरी कि

 अब बस मुस्कुराते रहता हूँ!  हाँ अब भी कई गम उठाते रहता हूँ
  पर अब आदत बदल की है मैंने, अपनी खुशियों को रिझाता रहता हूँ।

बातें बहुत हैं, पर मैं बस उसी से कह पाता हूँ जो मेरे दिल के पास हो, नहीं तो दिल की बातें दिल में रहें तो बेहतर, क्योंकि इस दुनिया में लोग आपको जानने के बाद आपको मानने से ज्यादा तोड़ने में यकीन रखते हैं, और यह एक सर्वव्यापी सत्य है।

हाँ अब मैं पहले से बहुत बदल चुका हूँ, एक्चुअली एक्सीडेंट का बाद से मेरा सीरियस रहना भी बंद हो गया है। मुँहफट तो हूँ ही, अब बिना ये परवाह किये कि किसी को सच बुरा लगेगा मुँह पर बोल देता हूँ। खैर जाने दो..... गैरों से हमारा राबता क्या...? जो अपने हैं, वही सबसे खूबसूरत सपने हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो 2021 शानदार साल रहा, बहुत कुछ सीखा, समझा और अब आगे बढ़ने की बारी हैं। 

ये यादें जो अनकही हैं, उन्हें अनकही ही रहने दो
कहीं कह दिया तो नींदें हराम न जाएं...! 

वैसे भी मैं अपनी पर्सनल चीजों को इतना पर्सनल रखता हूँ कि मुझे खुद भी नहीं पता होती वो बातें.... हीहीही...! सब खुश रहो, मस्त रहो..!

राधे राधे🥰🙏


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2 Comments

Gunjan Kamal

30-Dec-2021 09:16 PM

बहुत खूब सर

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Swati chourasia

30-Dec-2021 08:19 PM

Wahh bohot hi khubsurat dairy 👌👌

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