खुद से एक मुलाकात – डायरी✍️( भाग 15)
डायरी-खुद से एक मुलाकात
31/12/2021- अलविदा 2021 ।
दिन – शुक्रवार
अलविदा 2021....जी हा दोस्तो... आज साल का आखरी दिन है। इस वक्त दोपहर के 2 बजने को है जब
मै ये लास्ट पेज लीख रहा हु.....। हम आज के दिन साल का आखरी दिन मनाते है। किन्तु
हिन्दुस्तान मे ये साल का आखरी दिन नही होता। हमारा हिन्दु धर्म के अनुसार आखरी
दिन दिवाली होता है।
याद करो दिवाली कैसे मनाते है हम। और याद कीजीये क्रिश्चियन ईरा का
ये साल का आखरी दिन कैसे मनाया जाता है। आज के दिन सब से ज्यादा शराब पी जायेगी।
आज के दिन सब से ज्यादा पार्टीया होगी। क्या यह ही हमारा जीवन है, जीवन शैली है, ये है हमारा
कल्चर ??? बिलकुल नही।
लेकिन आज कुछ अलग बाते करे क्या? सवाल जवाब तो होते रहेंगे। जब ये
डायरी लेखन प्रतियोगिता की घोषना की गइ....मुजे कदैव प्रतियोगीता प्रभावित नही
करती। क्युकी तालिया और गालिया दोनो मुजे ज्यादा पसंद नही। सोशियल मीडीया आज मानो
हमारा धर्म बन चुका है। विश्व बहुत करीब आ चुका है। लोग एकदुसरे को आसानी से
कोंन्टेक्ट कर लेते है। इस के भी अलग फायदे है लेकिन नुकसान भी है। क्युकी सोशियल
मीडीया एक वर्च्युअल लाइफ है। और उस लाइफ मे दिल ज्यादा तुटते है। इसिलिये मै
सोशियल मीडीया का बहुत ही कम उपयोग किया करता हु।
डायरी लेखन के बारे मे जब एंजलजी ने बताया तो मैने कहा की मुजे
ज्यादा नही आता की मै अपने अविस्मरणिय यादो को सोशियल मीडीया मे ले जाउ। एंजलजी ने
भी कुछ ज्यादा जोर नही दिया था बस इतना कहा की कुछ लिखोगे तो शायद कीसी को कुछ
सीखने को मिले। सुनकर तो अच्छा लगा की मै लीखु और उसे पढकर कोइ सीखे।
फिर सोचा क्या है मेरे पास बाटने को। कुछ खट्टी मीठी यादो के सिवा
कुछ नही मेरे पास। मै कही नये अन्जान शहर मे सेट होता हु, वहा घुमता हु, संघर्ष करता हु, जीतता हु, हारता हु, गुस्सा करता हु, आनंद करता हु
इस से पढनेवालो को क्या फायदा...बस कुछ लाइक्स मिलेंगे...कुछ टिप्पडी आयेगी और वो
भी अच्छी अच्छी बाते लिखंगे और कुछ नही।
वास्तव मे मेरी लाइफ मै बहुत शेयर करता हु। अपने फेमिली, दोस्तो, रिश्तेदार, सहकर्मीयो के
साथ क्युकी इस से मुजे एक फायदा जरुर होता है। मेरी सारी तकलीफे मैने एक बार बोल
दी...मेरा मन हलका हो जाता है और इस से बी.पी. हमेशा कंट्रोल मे रहता है। और दुसरा
मै अगर खुला तो सामनेवाला भी अपने अनुभव शेयर करता है जिस से उस की सारी तकलीफे मै
सुन लेता हु और कोशिश करता हु की उसे कुछ काम मे आ जाउ।
तो अगर मै वहा लाइफ शेयर करता हु तो सोशियल मीडीया मे क्यु नही? ये सोचकर आज
अपने बारे मे कुछ लिखता हु...शायद कुछ लोगो के काम आ जाये....।
1. इस वक़्त मै भुज
शहर (गुजरात) सर्विस कर रहा हु...ये वही सीटी है जिस के उपर से अजय देवगन की
मुवी 'भुज' बनी है। 2001 मे यहा भूकम्प आया था और उस के बाद इस का सर्वांगी विकास हुवा है।
2. मै जहा का
रहनेवाला हु, मेरी जन्मभुमी वो जगह है जो आजादी के बाद श्री सरदार वल्लभभाइ पटेल
ने हिन्दुस्तान के सर्वो राज्यो का विलीनीकरण करवाया तो सब से पहले हमारे महाराजा
श्री क्रिष्नकुमार सिन्ह जी ने अपना स्टेट अर्पण कीया था....मेरे शहर का नाम है 'भावनगर'। हिन्दुस्तान
के पश्चिमी छोड पर आखरी शहर....फिर 1600 कीमी का समुद्र कीनारा है जो
भावनगर से लेकर
तलाजा..महुवा...उना...दीव...सोमनाथ....पोरबन्दर....जामनगर..द्वारिका तक चला जाता
है। एशिया का सब से बडा शिप ब्रेकिंग यार्ड 'अलंग' वहा का तेह्सील
है। जैन धर्म का विश्व का सब से बडा तीर्थ स्थान 'पालीताणा' भी इस मे शामिल
है। मशहुर कथाकार और गीनीज वर्ल्ड रेकोर्ड जिस ने राम कथा करते करते स्थपित किया
वो 'मोरारी बापु'
यहा के है।
3. जिस विभाग का
मैने अक्सर अपने पन्नो पर अब तक जिक्र किया है और जहा मै सर्विस करता हु वो है
एशिया की तीसरी और हिन्दुस्तान का प्रथम टेलीकोम विभाग...'भारत संचार
निगम लिमिटेड' (बीएसएनएल)...जहा पर मै एकाउंट्स ओफिसर की पोस्ट पर सेवाये देता हु।
4. मुविज़ मुजे
बचपन से बेहद पसंद है....यहा तक की मुविज़ के टाइटल्स तक मै नही छोडता इसिलिये आज
तक जिस शहर मे मै कम से कम एक दिन रहा हु वहा मैने मुवी देखना नही छोडा। सभी
प्रकार की मुविज मुजे पसंद है। संगीत का मै इतना शौखीन था की कभी कभी 16 से लेकर 20 घंटो तक गाने सुनता
रहता था। इसिलिये मैने कुछ क्लासिक संगीत भी सिखा है लेकिन पुरा नही सीख पाया।
5. संगीत सुन ने
का ही नही बजाने का भी इतना ही शौख पाल रखा है, इसिलिये कुछ हद तक हार्मोनियम, तबला और गीटार
सीखा है।
6. मेरी माताजी
बचपन मे गरबा गाया करती थी और मै भी गाना सुनते सुनते साथ साथ गाना गाया करता था।
मुजे पता ही नही था की मै अच्छा गा भी सकता हु। मेरे ही विभाग मे एक बार कल्चर
प्रोग्राम को मुजे हेंडल करना था और गुजरात के चिफ जी.एम. को फिल्मी गाना पसंद थे
तो उस ने जोर दिया की उस का प्रोग्राम अरेंज करवा देना। मेरे एक साथी अफ्सर बहुत
अच्छा गाते है उस को मैने दो गाने तैयार करने के लिए बोल दिया। बाद मे सोचा की दो
गाने एक साथ कैसे गायेंगे। मैने विभाग मे अंताक्षरी बहुत हेंडल की हुइ थी तो बीच
मे एक गाना मैने गा दीया....बस वही पर शुरुआत हुइ गाने की और कुछ स्टेज प्रोग्राम
भी कर लिये....केवल नीजी शौख के लिये।
7. बचपन मे मुजे ब्लड की बीमारी थी जिस मे मुजे कही भी गलती से भी चौट
आ जाये तो पतला पानी जैसा खुन शुरु हो जाता था जो 2,3 या 5 घंटे तक रुकता
नही था। कइ बार खुन शुरु होता था तब मुह और नाक से मांस नीकल आता था और ऐसी हालत
मे रातो रात मुजे घर से अहमदाबाद ट्रीटमेंट कराने ले जाना पडता था। एक ही डोक्टर
ने मेरा इलाज किया और बताया की इस रोग का इलाज जब मै 18 या 20 साल का हो जाउ
और होर्मोंस चेंज होंगे तब ही सबकुछ अच्छा होगा। इस के लिये मुजे दो काम करने के
लिये बता दिया गया था....1 गुड, मीठाइ, पुराना खाना,
बहुत सारी सब्जीया, भारे खुराक, प्योर दुध ये
सारे 20 साल तक प्रतिबन्धित कर दिये गये....2. डेल्टाकोल्ट्रील नाम की टेब्लेट
जो स्टीरोइड है उसे जब जब खुन आयेगा तब खानी होगी.....ये टेब्लेट प्योर पोइज़न है
और मैने 22 साल तक खाइ है।
8. इस रोग की वजह
से आउटडोर खेल मेरे लिये हमेशा के लिये प्रतिबन्धित कर दिये गये थे। मेरे
माता-पिता ने एक काच के बर्तन को जैसे जतन करते है वैसे मेरा पालन किया है। स्कुल
से घर और घर से स्कुल वो मेरी हमेशा से लाइफ रही थी। यहा तक की मेरा रीजल्ट तक
मेरे पिताजी लेने जाते थे।
9. ब्राह्मिन होने
के नाते से जब मेरा और मेरे दोनो भाइओ का यग्नोपवित संस्ककार बडे धामधुम से हो रहा
था उसी दिन मेरे पिताजी का हार्ट एटेक से स्वर्गवास हो गया और वो दिन था 14 फरवरी जो आजकल
वेलेंटाइन डे के रुप मे फेमस है और मै कभी नही मनाता।
10. मुजे मेरे
पिताजी का सर्विस मिला है और जब मैने ड्युटी जोइन की उस वक़्त पोस्ट ओफिस, बेंकिंग सेवाये
उस के बारे मे मेरा नोलेज बिलकुल शुन्य था। जिसे मै बचपन मे अंकल के नाम से पुकारा
करता था वो ही पेहला मेरा अफ्सर था। ऐसे अंकलो की फौज थी विभाग मे और कीसी ने भी
मुजे नही बक्सा था। खुन के आसु रुलाते थे। ये सिलसिला 5 साल तक चला और
जब मैने एक सेक्शन से दुसरे सेक्शन मे ट्रांस्फर मांगी तब मुजे रीलीव नही किया
जाता था। उस दिन एक एक अंकल को मैने मेरी औकात दिखाइ और सरे आम इतनी गालिया सुनाइ
की उस दिन से मेरे सामने कोइ लडने नही आता था।
11. इस वारदात के
बाद मैने यु.पी., साउथ...बेंगोली..राजस्थानी...बीहारी ऐसे ऐसे अलग अलग स्टेट के
अफ्सरो के साथ काम किया लेकिन एक भी मेरी गाले सुने बगैर गया नही। क्युकी बचपन का
खुन्नस मैने नीकालना शुरु किया था।
12. जो शरीर बेजान
सा था, बिलकुल पतला जिस मे खुन की मात्रा ही कम थी...उसी शरीर से मैने
विभाग के लिये सिजन क्रिकेट,
बास्केट बोल, टेबल टेनिस
खेला है और एवार्ड भी जीते। इस खेलो के लिये मै भारतभ्रमण कर चुका हु।
13. कल्चर
प्रोग्राम हमारे विभाग का सब से बडा प्रोग्राम है...उस मे मै गुजरात के मेनेजर के
रुप मे बहुत बार गया हु...और ड्रामा लिखता था और रोल भी निभाता था।
14. नाटक करने के लिये मैने
लीखना शुरु किया था....जब की पहेले मै क्रिकेट के स्कोर लिखता था....अब तक बहुत
सारे नाटक लिखे है और प्ले भी किये है.....लेकिन केवल विभाग के लिये....प्रोफेशनली
बिलकुल नही।
15. मेरा खुद का एक
ट्रस्ट भी है 'अनन्य चेरिटेबल एंड कल्चरल ट्रस्ट' जो पिछले कइ सालो से बन्ध पडा
है...कुछ नीजी वजह से...जो मै चाहता हु के जरुर एक बार फिर से शुरु करुंगा।
16. मेरे विभाग के
बडे अफ्सरो ने मेरी केरियर के पहले ही साल मे एक घोटाला किया था जिस मे मुजे केवल
रुटिन फाइल रखनी होती थी। फिर भी जिस दिन ये स्केंडल पकडा गया...सब के साथ मेरे पर
भी केस हुवा और केवल 21 साल की उम्र मे मैने सी.बी.आइ. को फेस कीया था...बीना डरे और बीना
हिम्मत हारे और खुद उन के अफ्सरो ने मुजे कहा था की 'तेरा कोइ रोल
नही है तु ठीक बच जायेगा' ।
17. सी.बी.आइ. ने
तो मुजे छोड दिया लेकिन विभाग ने नही छोडा और मेरे पर कइ सालो तक इंक्वायरी बिठाइ
रखी। तीन तीन इंकवायरी के बाद मुजे बिलकुल निर्दोष साबित कर दिया गया....लेकिन तब
तक इस विभाग मे न सेलेरी बढाइ और कोइ प्रमोशन नही दिये गये। आप ने इसी डायरी के पन्नो मे शुरुआत मे
पढा होगा की मेरे यहा के अफ्सर मुज से जुनियर है वो इसी वजह से क्युकी वे लोग
प्रमोशन पा चुके है और मुजे अभी कोर्ट मे जाना होगा। अगर मै रेग्युलर प्रमोशन पा
लेता तो आज गुजरात सर्कल के चिफ की पोस्ट पर होता। क्युकी एकाउंट्स ओफिसर की
परीक्षा मे मै गुजरात से 16 वा क्रम मे पास हुवा था और अभी का मेरा चिफ उसी परीक्षा मे पास तो
नही हुवा लेकिन रीव्यु रीज़ल्ट मे पास हुवा था।
18. मेरे स्वभाव का गेरलाभ मेरे
फेमिलीवाले भी उठाते है और रीस्तेदार और दोस्त भी। मेरे एक दोस्त के दोस्त ने एक
ब्लेंक चेक पर जुठी साइन कर के मुज पर केस किया था। आदत से उसे समजाया लेकिन उस के
शब्द थे..’या मुजे पैसा दो या फिर तेरी नौकरी खा जाउंगा।‘ जब बात फेमीली के
अस्तित्व पर आइ तो मैने लडने का फैसला लिया और 5 साल तक कोर्ट मे लडा। जब कोर्ट के
फैसले का दिन था वो मेरे पैर पकडकर माफी मांगने लगा और केस वापस ले लिया। माफ तो आदत
से मजबुर कर दिया लेकिन बोला की आज के बाद अपना चेहरा दुसरीबार मत दीखाना।
19.
जिस शरीर की वजह से मैने खेलना, खाना सब कुछ छोड रखा था वो होर्मोंस चेंज होने से अच्छा
हो गया और सबकुछ एंजोय किया जो बहुत सालो तक नही किया था। स्वीट्स तो मुजे बेहद
पसन्द है और मेरी फेवरिट डिश है ‘पुरणपोली’। जिस दिन ये डिश बनती है मै सिर्फ वो
ही खाता हु...कुछ तीखा नही..कुछ और नही।
20.
बारिश मुजे बिलकुल पसन्द नही....सर्दिया ज्यादा पसन्द है और क्युकी एक बार हार्ट
एटेक (जो मुजे वारसे मे मीला है) आने के बाद गर्मी तो बिलकुल बर्दास्त के बाहर है।
आउटिंग मुजे इसिलिये पसन्द नही क्युकी बरसो तक घर से बाहर ही नही नीकला था।
ये
सारी बाते क्यु लीखी? क्युकी मै कुछ बाते बताना चाहता हु....
· बडे बडे महानुभाव, संत, माता-पिता,
गुरुजी सब की बाते पढो, सुनो लेकिन अनुकरण कभी मत करो। क्युकी उस की बाते अपने
अपने युग मे सत्य थी। आज के अपने युग के केवल चितशक्ति से जीता और जीया जा सकता
है।
· जितना मान-सन्मान माता-पिता या
गुरुजी की करनी चाहिये उतना ही मान-सन्मान अपने पति या पत्नी को देना चाहिये। क्युकी
एक लडकी जहा जन्मी, बचपन बीताया, खेलते खेलते बडी हुइ वो भाइ-बहन और दोस्त को
छोडकर वो आप के साथ जीवन बीताने आ जाती है। उसे उतना ही महत्व देना चाहिये। मेरा
एक ही मेसेज है...’जिस की नजरो मे मेरी पत्नी का सन्मान नही वो मेरा रिश्तेदार
नही...फिर क्यु वो मेरी माताजी ही न हो’ (जब की उन दोनो की बोंडिंग अच्छी है)। समाज
की वजह से जो भी दहेज या भेट के रुप मे मुजे सामान, चीज या भेट मुजे शादी मे
ससुराल से मिले थे उसे मै एक दिन कीसी को बीना बताये ससुराल मे वापस लौटा दिया।
(उस की लडकी को नही लौटाया कभी)
· एक लडकी या औरत के साथ कभी फ्लर्ट मत करो। एक प्रयोग कर लेना कीसी के साथ फ्लर्ट करना और देखना कीतनी देर तक आनन्द मिलता है और दुसरा रिश्ता बढाना...देखो कीतना आनन्द मिलता है और कीतने वक़्त तक मिलता है। (वैसे भी फ्लर्ट किया हुवा रिश्ता आज तक शादी मे परिवर्तित नही होता है और अगर गलती से हो भी गया तो टिकता नही)
· अपने फीजीकल बोडी मे एक सुक्ष्म
शरीर भी होता है जिस मे सात चक्र होते है। जिस मे सब से पहेला चक्र है ‘मुलाधार चक्र”
जो हमारे बोडी के नीची दोनो द्वार के बीच स्थित है और गणेश का स्थान है। उस के ठीक
उपर मा कुंडलिनी का निवास है। (जन्म कुंडली और कुंडलीनी शक्ति दोनो अलग है)। इस के
बारे मे अलग से विस्तार से मैने अपने कहानी ‘जाने कहा” मे बताइ है। उपर का सब से
उपर सिर पर सहस्त्रार चक्र रहेता है जो शिवजी का स्थान है। शिव-शक्ति का मिलन ही
ध्यान के पराकाष्ठा है।
· जब आप कीसी को बुरी नजर से देखते
हो तो मुलाधार चक्र खराब रहेता है। और वो मा कुंडलीनी शक्ति को उपर जाने ही नही
देगा क्युकी अपनी पौराणिक कथाओ मे भी लीखा है की मा शक्ति का रक्षक है श्री गणेश।
और उस का अपमान मतलब आप के जीवन की सब से बडी बरबादी। ऐसे इंसान को जीवन मे कभी
सुकुन नही मिलता और इस के सजा जरुर मिलती ही है।
· दुसरा जीवन मे कभी कीसी चीज,
वस्तु, इंसान की चाह जरुर रखो और उसे पाने के लिये पुरी कोशिश करो। लेकिन वो मिल
ही जाये ऐसे अपेक्षा कभी मत रखो। हमारा सब से बडा दुश्मन हमारी अपेक्षा है। कीसी
से भी कोइ उम्मीद या अपेक्षा हमारे जीवन की सब से बडी बाधा बन सकती है। मैने आज तक
कोइ भी वस्तु, चीज, खाना या रिश्ता कभी कीसी से मांगा नही। ये बात मेरी माताजी और
पत्नी दोनो को लागु होते है उस से भी कभी कुछ नही मांगा। जो दिया उसे स्वीकार किया
और नही दिया उस के लिये धन्यवाद दिया।
·
जो कुछ मिला है या मिल रहा है उस का
धन्यवाद जरुर करो। मैने बहुत सारे अफ्सरो के साथ लडाइया लडी है लेकिन एक भी मुज से
नाराज हो के नही गया। आज भी सब के साथ संबंध काफी अच्छे है।
·
कोइ भी लक्ष्य मे सब से बडी बाधा हमारा
माना हुवा ‘इश्वर’ है। क्युकी इश्वर उस की ही परीक्षा लेता है जिस मे फुट फुट कर
सहन करने की शक्ति हो। वो उसी की परीक्षा लेगा जिस की आप को सब से बडी चाह रही है।
क्युकी इश्वर भी मानता है अगर मैने दे दिया तो इस के लायक भी है या नही।
·
रिश्ते दिल से निभाओ दिमाग से कभी
नही। सोच लो अगर उपरवाला दिमाग पर उतर आया तो कही के नही रहेंगे हम।
·
बस लीखते लीखते तीन बार ओटो डीलीट हो चुका है। आज लीखने की और ताकत नही बची। ज्यादा पढना हो तो मेरी कहानी ‘जाने कहा??? ध रीवोल्युशन’ को जरुरु पढो।
ये
बाते आज लीखी है...अपने दिल को खोलकर आज लेखनी
परिवार को सौपा है....अगर पढनेवालो को मजा आया....या कुछ इंस्पाइरेशन मीली
हो तो मेरे नसीब...बाकी हम भावनगर वाले खुद भी बहुत कम तालिया बजाते है तो दुसरो
की उम्मीद रखने की हमे कोइ लालसा नही रखनी चाहिये। हर एक का जीवन अपनी अपनी डायरी
ही है। उपर पहेले ही मैने लीखा है कीसी का अनुकरण मत करो। मेरा भी मत मानो। अपने
दिल की बाते ही ज्यादा सुनो।
हा एक
बेहतरीन स्टोरी पढनी हो जहा प्रेम की पराकाष्ठा लीखी गइ है और मुजे बहुत पसन्द आइ
है वो अपुर्वासिंघ की कहानी जरुर पढे...’मेरी पगली..मेरी हमसफर’। बस आज इतना
ही...आप सब को नये साल की खुशिया बहुत बहुत मुबारक और शुभकामनाए....कल 1 जनवरी को
लेखनी का जन्मदिन है। ‘लेखनी’ के पहेले जन्म्दिन की ढेर सारे शुभकामनाये और सारे
एड्मिन टीम को शुभेच्छा एवम सफलता मिले ऐसी प्रार्थनाओ के साथ.....डायरी लेखन
समाप्त करता हु।
अरे
हा....मेरा नाम बताना भुल गया....वैसे क्या रखा है नाम मे भुल जाइये....और अगर
कीसी को जान ना है तो हमारी एंजेल की कहानी ‘मेरी पगली..मेरी हमसफर’ जरुर पढे
क्युकी इस लाडली ने उस कहानी मे एक्मात्र विलन रखा है जो मेरे ही नाम से है।.....bye Diary….have a nice life forever……
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PHOENIX
01-Jan-2022 05:42 PM
समय समय का काम करता है। मुश्किले तो हमेशा परछाइ होती है हमारी। इसे कभी पीछा नही छुटेगा। बस पानी कीतना भी गेहरा हो तैरते रहेना चाहिये। धन्यवाद इतनी सारी कोमेंट्स के लिये। और बहुत धन्यवाद नये साल की शुभकामनाए के लिये। नया साल...एक नयी चुनौती..नया संघर्ष...नयी शुरुआत..देखते है कीतनी परिक्षाये और बाकी है।
Reply
🤫
01-Jan-2022 04:40 PM
काफी अच्छा डायरी लेखन है आपका, कितनी मुश्किलें आई है जीवन में...अब सब ठीक है जानकर अच्छा लगा। नव वर्ष मंगलमय हो ऐसी कामना है। बेहतरीन... बेहतरीन बेहतरीन
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PHOENIX
31-Dec-2021 07:19 PM
Thank you so much for reply....
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