सीख
इतिहास बना दें ऐसे जैसे,
कर दिखलाया कोरोना,
अपने भीतर जितने दुश्मन,
है उनका अब न होना।
झूठ,कपट,आलस्य त्यागकर,
हम अधिकारिक विजयी बनें,
किस पथ पर कितना चलना है,
ये भी अब हम स्वयं चुने।
मंज़िल तक जो रस्ता जाता,
है उस रस्ते के हो लें,
अपने हक का हर एक मंज़र,
खुद से लूट सके तो लें।
जो कहता है क्या,क्यों,कितना?
खुद प्रतिकारित हो जाएगा,
खुद को खुद से खुद में देखें,
सब प्रकाशित हो जाएगा।