मेरी काल्पनिक दुनिया
"मेरी काल्पनिक दुनिया"
खूबसूरत बहुत है मेरे कल्पनाओं का शहर
मैं इसमें डूबते उभरते डुबकियां लगाता हूं..
द्वंद, ईर्ष्या,स्वार्थ और
दिखावे से परे है यह दुनिया मेरी..
मैं इसमें ही सुबह शाम,
चाय सी चुस्कियां लगाता हूं..
खूबसूरत बहुत है...
अपनी कल्पनाओं में संजोता हूं
खूबसूरत सा भविष्य अपना..
सपना साकार हो मेरा इसलिए
खुद को तराशने का हुनर आजमाता हूं..
खूबसूरत बहुत है...
आज की इस स्वार्थी दुनिया में
इस काल्पनिकता का ही सहारा है...
वास्तव में तो अब यहां जीना दूभर है
यहां अपनों का साथ कम है...
इनकी स्वार्थपरता सबसे उपर है
यही एक गम मुझे हरदम सताता है..
खूबसूरत बहुत है....
हां कल्पना करता हूं मैं एक प्रखर राष्ट्र की
जिसमें मेरे देश का हर एक युवा राष्ट्र चिंतन करें..
विचार करें,समान व्यवहार करे,
अन्याय का डटकर प्रतिकार करे..
इन्हीं विचारों में खोया मैं
रोज नये आयाम बनाता हूं...
खूबसूरत बहुत है....
मेरी "काल्पनिक दुनिया" देखती है
राहें किसी हमसफर की...
जो साथ दे मेरा इन काल्पनिक रचनाओं को
आधार में बदलने की...
इसी आशा में यह गीत गुनगुनाता हूं..
खूबसूरत बहुत है मेरे कल्पनाओं का शहर
मैं इसमें डूबते उभरते डुबकियां लगाता हूं...।।
_अखंड मिश्र 'एके'✍️
(स्वरचित)
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Seema Priyadarshini sahay
15-Jan-2022 03:17 PM
बहुत खूब
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AKHAND MISHRA
18-Jan-2022 08:44 PM
आभार 🙏
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