AKHAND MISHRA

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आज कल बस मौन हूं मैं

                    _"आजकल बस मौन हूं मैं..."

                  

आजकल बस मौन हूं मैं..
क्या बताऊं कौन हूं मैं..

अलग हूं, एकांत हूं मैं
हां कि बिल्कुल शांत हूं मैं..

है कि दुनिया अलग मेरी
प्रीत है खुद से घनेरी..
क्योंकि सब कुछ व्यर्थ ही है
बस यही सच्चा अर्थ भी है..

खुद को पूरा समझ पाऊं
लक्ष्य अपने भेद पाऊं
तो फिर समझूं कि सफल हूं..

हां की बस मै सोचता हूं,
तथ्य को बस खोजता हूं..
मिल गया जो सही उत्तर
कठिनाइयां होंगीं निरुत्तर..

विपत्तियों से मैं कब हूं हारा,
मैं अकेला खुद का सहारा..
रोज इनको झेलता हूं,
रोज इनसे खेलता हूं..

रोज हूं गिरता-संभलता,
मिलती है मुझको विफलता..
एक दिन सब जीत लूंगा,
सफल होकर रीत लूंगा..

अब तो केवल मौन हूं मैं,
क्या बताऊं कौन हूं मैं....!!

रिश्ते नाते व्यर्थ हैं सब,
कुछ नहीं बस छद्म है सब..
खुद को जो तुम जान लोगे,
जीवन में उतना मान लोगे..

कर्तव्य जो भी सामने हैं,
उनको डरकर रेलता हूं...
ना है शिकवा ना शिकायत,
ईश्वर से पूरी इनायत..

हे प्रभु...तुम साथ देना,
तुमसे ही बस आश है ना..
बस शांत ही होकर चलूं मैं,
और ना कुछ प्रार्थ मेरी..

आजकल बस मौन हूं मैं... 
क्या बताऊं कौन हूं मैं...


_अखंड मिश्र \'एके\'✍️
         (स्वरचित)

(Note- Writing or posting the post anywhere without the real name of the author is punishable under the CopyRight Act 1957. All rights reserved.)

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6 Comments

Punam verma

30-Jan-2022 09:12 AM

Nice very nice sir

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AKHAND MISHRA

30-Jan-2022 11:35 PM

Thank you so much 🌸🌸

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kapil sharma

29-Jan-2022 08:50 PM

बहुत अच्छा लिखा आपने 🙏

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AKHAND MISHRA

30-Jan-2022 11:35 PM

आभार 🙏

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Swati chourasia

29-Jan-2022 08:37 PM

वाह बहुत ही खूबसूरत रचना 👌👌

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AKHAND MISHRA

30-Jan-2022 11:36 PM

हार्दिक आभार स्वाति जी🌸🙏

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