लेखनी कविता -14-Feb-2022 (कालाबजारी )
(5) कालाबजारी
निजी संस्थान हो या हो सरकारी
कहाँ नही हो रही ये कालाबजारी
नश नश में मानव के घुल गया है
बनकर आज एक बड़ी महामारी
बस सरकार पर उंगली उठाना है
कब समझोगे अपनी जिम्मेदारी
जागरूक हो जाओ फिर देखना
जड़ से खत्म होगी कालाबजारी
उचित-मूल्य की दुकान पर देखो
तो वहां भी हो रही कालाबजारी
कहां गायब है सारे, लग रहा वो
घोर निद्रा में सो रहे पदाधिकारी
उनके नाक के नीचे चल रहा है
ये कालाबजारी की दुकानदारी
देना होगा हर एक को जवाब
बताओ है कहाँ ये मंत्री प्रभारी
ना अनदेखी ना हो लापरवाही
दमखल के साथ हो छापेमारी
जागरूक हो जाए सारे जनता
हो ऐसे जगह पर कड़ी पहरेदारी
हर एक आम आदमी समझे तो
जड़ से खत्म होगी कालाबजारी
Seema Priyadarshini sahay
16-Feb-2022 04:00 PM
बहुत खूबसूरत
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