Gopal Sinha

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शीर्षक -- कदम, दैनिक कविता लेखनी प्रतियोगिता -03-Mar-2022

कदम

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कदम न रुके, 
हमेशा बढ़े, 
आसमां की ओर उठे,
ज़मीं पर टिके।

कदमों पर खड़ा,
कदमों का सहारा,
पहुंचाएगा वहां,
मंजिल है जहां।

कदमों तले,
कोई न कुचले,
रहे ना पड़े,
टूटे- बिखरे।

कदम से कदम,
मिलाकर चल,
खुशी के गीत,
गाते चल।
वतन की राह में
जिंदगी लुटाते चल।

-- गोपाल सिन्हा,
    पटना,
    ३-३-२०२२


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5 Comments

Arshi khan

04-Mar-2022 06:38 PM

Nice

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Punam verma

04-Mar-2022 05:12 PM

Very nice

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Abhinav ji

04-Mar-2022 09:13 AM

Nice

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