ज़िंदगी
ज़िंदगी यूँ ही अच्छी लगती है
कुछ नम सी
पत्ते पर गिरी हुई शबनम सी
ज़िंदगी यूँ ही अच्छी लगती है
कुछ सर्द सी
दिल में दबे हुए हल्के दर्द सी
ज़िंदगी यूँ ही अच्छी लगती है
कुछ थमी-थमी सी
अपने हालातों में रमी-रमी सी
ज़िंदगी यूँ ही अच्छी लगती है
कुछ भूली बिसरी सी
गुज़रे लम्हों की मीठी याद सी
ज़िंदगी तू तब भी अच्छी लगती है
जब तू परवाह नहीं करती है
पर पास बस सिर्फ़ तू ही होती है
शहला जावेद
Swati chourasia
27-Jun-2021 08:09 PM
Nice 👌
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Swati Charan Pahari
27-Jun-2021 06:34 PM
बेहतरीन
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ऋषभ दिव्येन्द्र
27-Jun-2021 06:02 PM
खूब लिखा आपने 👌👌
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