आशीर्वाद
दादा जी ने बोया बीज,
पिता जी ने खाए फल,
बेटे ने किया उपयोग,
बचाने को अपना कल।
वृक्ष का ऋण लेकर,
बेटा भुल गया सब,
फिर उसके बेटे ने,
प्रश्न किया उससे तब,
कहां गया वह पेड़ जिससे,
दादा जी ने खाए थे फल,
कहां गया वह पेड़ जिससे,
आपने बचाया था अपना कल,
जो बेटे ने किया प्रश्न उससे,
पिता जी कहां है मेरा फल,
फुट-फुट कर रो पड़ा वो,
कर याद अपना बिता कल,
फिर आँसू अपने रोक,
लाया कुछ मुठ्ठि में भर,
और भरे गले से कह डाला,
बेटा ये है मेरा बिता और,
तेरा आने वाला कल।
😢😢😢😢😢😢
By:- अक्षत कोठियाल
ऋषभ दिव्येन्द्र
30-Jun-2021 07:12 PM
जबरदस्त बन्धु जबरदस्त 👌👌
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मनोज कुमार "MJ"
30-Jun-2021 03:31 PM
Bahut hi Behtreen
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Niraj Pandey
30-Jun-2021 02:34 PM
वाह बहुत खूब👌
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