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आशीर्वाद

दादा जी ने बोया बीज,
पिता जी ने खाए फल,
बेटे ने किया उपयोग,
बचाने को अपना कल।

वृक्ष का ऋण लेकर,
बेटा भुल गया सब,
फिर उसके बेटे ने,
प्रश्न किया उससे तब,

कहां गया वह पेड़ जिससे,
दादा जी ने खाए थे फल,
कहां गया वह पेड़ जिससे,
आपने बचाया था अपना कल,

जो बेटे ने किया प्रश्न उससे,
पिता जी कहां है मेरा फल,
फुट-फुट कर रो पड़ा वो,
कर याद अपना बिता कल,

फिर आँसू अपने रोक,
लाया कुछ मुठ्ठि में भर,
और भरे गले से कह डाला,
बेटा ये है मेरा बिता और,
तेरा आने वाला कल।
😢😢😢😢😢😢

By:- अक्षत कोठियाल

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4 Comments

जबरदस्त बन्धु जबरदस्त 👌👌

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Bahut hi Behtreen

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Niraj Pandey

30-Jun-2021 02:34 PM

वाह बहुत खूब👌

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