Sahil writer

Add To collaction

आमदनी



विषय -- आमदनी 


कैसे हो जमाने में अब गुजारा भैया ।
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया।।
इस मंहगाई ने लोगों की कमरिया तोड़ी।।
बाकी सरकार ने कोई कसर न छोड़ी ।।
रो रहे गली गली में लोग और लुगइया ।
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया।।
डेड सौ का तेल खाएं कैसे पचाएं ।
परेशान दिल को कहां तक समझाएं ?
अब कौन है जहां में हमारा बचैया।
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया ।।
बाहर धूप तेज धूप है अंदर गर्मी में मरें।
ऐसे में सजनवा क्या करें क्या न करें।।
बूढ़ी अम्मा चीख रही -"हाय री दैया"‌।
अठन्नी है आमदनी औरखर्चा रुपैया ।।
ब्लाउज के कपड़ा आ रहे दो सौ के।
जनता बेचारी कराह रही बेचैन हो के।।
नहीं है जग में अब कोई  लाज रखैया।
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया।।
 उल्टी हवा बह रही और नाव सीधी चल रही।
बस हर आदमी को यही समस्या  खल रही।।
राम जाने क्या होगा इस काल का हुवैया। 
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया।‌।
अब आओ भैया राजा भगवान के भजन कर लें।
एक संग बैठकर शांति विकास का मनन कर लें।।
तू ही मेरा बाप है और,तू ही मेरी मैया ।
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया ।।
कैसे हो जमाने में अब गुजारा भैया।
अठन्नी है आमदनी और खर्चा रुपैया।‌

 Sahil writer 

   14
6 Comments

Shnaya

19-Apr-2022 04:15 PM

Very nice 👍🏼

Reply

Gunjan Kamal

19-Apr-2022 02:15 PM

शानदार प्रस्तुति 👌👌

Reply

Art&culture

19-Apr-2022 11:38 AM

👍👍

Reply