विषय -- विदाई
बेटियां मेरी आँखों का तारा है।
उससे ही मेरा आंगन उजियारा है।।
छम छम बाजे पैजनिया !
आंगन आंगन नाचे बिनियां!
पापा मुझे एक बात बता दो
ज़रा अच्छी तरह समझा दो
आँख खुली जब सूरत मैया की देखी ।
यह सब है मेरी तकदीर की लेखी।।
खिलती जब मेरे चेहरे पर मुस्कान तुम भी मुस्काते थे !
आए अगर आंख में आँसू मम्मी पर तुम चिल्लाते थे ।।
बिटिया का न घ्यान धरती तुम जगत माता बनती हो !
लाल हो गयी है आंखें इसकी कौन सी दुनिया मे रहती हो !
प्यार मुझे सब का सम्पूर्ण मिला ,न बेटी होने का कोई अभाव रहा !
पढ़ लिख कर, बड़ी अफसर बन जाओ गुरुजन का आशीष पला !
नाजों से पली थी हिम्मत और संघर्ष की धनी बताया!
संस्कार , सम्मान , आदर सत्कार से जीना सिखाया !
अवगुण निकालकर मेरे भीतर सद्गुण भर दिए।
मेरी राहों में से कांटे हटा कर साफ़ कर दिए!
आज तुम जगत की रीत समझ रहे हो
अपने होकर खुद से गैर बात कर रहे हो !
बेटियां तो होती ही है पराई कर दो अब इसकी विदाई कन्यादान करके खुद को धन्य कहलाते हो !
पराया पराया कह कर दिल में छुरिया चलाते हो !
अनजाने से गैरो को हमारा अपना बताते हो !
बांध कर एक अजनबी के साथ मर्यादा निभाते हैं !
पापा मानते है तुम विदाई रीत अपनाते हो !
चली आ सदियों से जग की रस्म निभाते हो।
पर जिस घर आँख खुली बीता बचपन जवानी ने ली थी अंगड़ाई !
कोने कोने में गूँजी मेरी किलकारी आज लगती क्यों है पराई !
पापा बस तुम इतना समझा दो
मेरे दिल को यह बात बतलादो।।
बेटियों क्यों करते हो तुम विदाई !
क्यों करते हो तुम विदाई !