काव्या
एकदम सुनसान रास्ता जिस पर एक लड़की आंख बंद करके बस चले ही जा रही थी। आसपास के माहौल से बेखबर.. जैसे कोई तो था जो उसे बुला रहा था.. पर वह बिना किसी की सुने चुपचाप चले जा रही थी। आसपास का माहौल बहुत ही डरावना दिखाई दे रहा था। पूरी सड़क खाली और सुनसान थी। केवल थोड़ी थोड़ी देर में कुछ कुत्तों के भौंकने की आवाजें आ रही थी।
इन सबसे बेखबर वह बस चले ही जा रही थी। रह रह कर, थोड़ी बहुत देर में कुछ कुत्ते उसकी तरफ दौड़ पड़ते थे और वह उन सब से भी अनजान बस अपने रास्ते जा रही थी। धीरे धीरे वह एक जंगल की तरफ पहुंच गई।
वह जंगल भी कोई ऐसा वैसा जंगल नहीं था.. खूंखार, आदमखोर जंगल कहलाता था। उस जंगल की तरफ दिन में भी कोई नहीं जाता था.. और वो आधी रात को बिना कुछ सोचे समझे उस जंगल में पहुंच गई थी।
थोड़ी देर बाद कुछ लोग किसी को ढूंढते हुए सड़क पर इधर-उधर भाग रहे थे। कुत्तों की आवाज़ें सुनकर वह लोग भी उस तरफ दौड़े.. पर जैसे ही उन्हें उस जंगल का एहसास हुआ.. उन लोगों ने दौड़ना बंद करके एक दूसरे की तरफ देखा। वह कुल 5 लोग थे.. दो अधेड़ उम्र के आदमी थे और तीन जवान लड़के। वह किसी को ढूंढ रहे थे पर जंगल के पास पहुंच कर उन लोगों की हिम्मत जवाब दे गई थी।
इस समय वह जंगल के अंदर किसी भी कीमत पर नहीं जाना चाहते थे। एक अधेड़ उम्र के आदमी ने बाकी सब को वापस लौटने का इशारा किया। भले ही वह चीज कितनी ही कीमती थी.. जिसे वह ढूंढ रहे थे.. पर जान से कीमती कुछ भी नहीं था। वह लोग इस समय किसी की भी जान का कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहते थे। धीरे-धीरे थके और हारे कदमों से वह लोग वापस लौट गए।
देहरादून…!! यही वह शहर था, जहां वह जंगल था। ऊंचे ऊंचे पेड़, इतने घने कि.. शायद उनसे गुजर कर सूरज भी धरती तक पहुंचने में कतराता था.. क्योंकि पेड़ थे ही इतने घने। ऐसा कौन सा पेड़ था.. जो उस जंगल में नहीं था.. देवदार, चीड़, पीपल,शीशम, नीम और सबसे ज्यादा पेड़ तो बरगद के थे। बड़े.. विशाल तने वाले.. जिनकी जटाएं धरती को ऐसे छूती थी.. मालूम होता था कि इतने बड़े पेड़ को लकड़ियों से टेक देकर संभाला गया हो।
धीरे-धीरे वो लड़की जंगल के अंदर और अंदर पहुंच गई थी। उसे अभी भी होश नहीं था कि वह कहां जा रही थी। वह अब तक कम से कम सात या आठ किलोमीटर चल ही चुकी थी। पर उसे देख कर ऐसा लग नहीं रहा था। वह धीरे-धीरे जंगल में अंदर और अंदर जा रही थी। कुछ ही देर में हो जहां खड़ी थी.. वहां चारों तरफ धुएं का गुलदस्ता जैसा ही दिखने लगा था। चारों तरफ धुंध फैली हुई थी.. इतनी तेज और इतनी घनी.. उस धुंध में एक हाथ को दूसरा हाथ भी सुझाई नहीं दे रहा था। जल्दी ही वो उस धुंध में खो गई। उसे यह नहीं पता था कि वह कहां और कैसे पहुंच गई??
दूसरी तरफ वह पांचो आदमी जंगल से वापस मुड़ कर शहर की तरफ जा रहे थे। पहला अधेड़ आदमी जिसने उन्हें वापस चलने के लिए इशारा किया था.. थोड़ी देर में बोल पड़ा, "तुम्हें पता है.. अब तक की दसवीं लड़की है जो इस तरह से हमारे चंगुल से निकल के उस जंगल मैं चली गई। तुम सोच भी सकते हो कि अगर इसी तरह लड़कियां गायब होती रही.. तो हमारे धंधे का क्या होगा..??" उसकी आवाज़ में गुस्सा और अपमान के भाव सुनाई दे रहे थे।
बाकी चारों लोग उस आदमी की बातों को गर्दन झुकाए सुन रहे थ?
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रतन कुमार
05-Dec-2021 11:46 PM
Nice story pr shayad puri nhi h ky
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Aalhadini
09-Dec-2021 11:07 PM
Ji.. aage ka part upload krna bhul gai thi.. sorry🙏🙏 baki parts jldi hi dalna start krti hu
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Arman
27-Nov-2021 12:04 AM
Behtreen
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Aalhadini
09-Dec-2021 11:06 PM
शुक्रिया 🙏🙏
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Zeba Islam
21-Nov-2021 06:00 PM
Bhot khoob
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Aalhadini
09-Dec-2021 11:06 PM
Shukriya🙏
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