Harsh jain

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दीवाना

मेरे हिस्से आई अब तक कोई सुबह या शाम नही! 

मैं उसका दीवाना हूँ और एक पल को आराम नही! 

सुबह सवाली बन जाती है रात डराती है मुझकों! 

याद उसे करता हूँ केवल और मुझे कुछ काम नही!! 


              हर्ष जैन जैन

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2 Comments

Vfyjgxbvxfg

15-Jul-2021 06:47 PM

बेहद खूबसूरत रचना

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Ravi Goyal

15-Jul-2021 05:52 PM

Bahut achhe 👌👌

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