AKHAND MISHRA

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क्योंकि मुझे जताना नहीं आता

क्योंकि मुझे जताना नहीं आता..

तुम्हें देखकर मुझे महसूस होता है...
कुछ अपना सा.. बस ठहरकर यूं ही देखता रहूं तुम्हें..
तुमसे बात करने को ढंग का बहाना भी नहीं आता..

               क्योंकि मुझे जताना नहीं आता...

क्या करूं उलझनें बहुत है जिंदगी में..
सोचता हूं मिलकर कहूंगा तुमसे बहुत कुछ..
पर सामने होता हूं तो कुछ सुलझाना नहीं आता..

                क्योंकि मुझे जताना नहीं आता...

जीवन भर के लिए तुम्हें पाने की तमन्ना रखता हूं..
पर लफ्ज़ो को इश्क का तराना नहीं आता..
दूर रहकर भी महसूस करता हूं तुम्हें..
तुम याद ना आओ ऐसा कोई बहाना नहीं आता..

                क्योंकि मुझे जताना नहीं आता...

कभी होगा मुकम्मल नजर-ए-इश्क मेरा
अपनी चाहत को लफ्जों से बताना नहीं आता..
हां..दुनियादारी जैसा दिखावे का प्यार निभाना नहीं आता..

                 क्योंकि मुझे जताना नहीं आता...

कभी समझो अगर मेरी बेरंग सी चाहत को..
देखकर बस नजरें अपनी झुका लेना..
समझ लूंगा बस इतने से ही..
और मुझे कोई अफसाना नहीं भाता..

क्योंकि कमबख्त.. मुझ जैसे को जताना नहीं आता...

        अखंड मिश्र  'एके'✍️
(स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित)

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1 Comments

Aliya khan

16-May-2022 02:10 PM

Apka link koma ki wjh se on nhi ho rhi h edit kr ke shikshak. Me se koma hta de

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