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लेखनी कहानी -21-May-2022

       सम्पर्क


क्यो ना होऊ मै इतनी खुश ,
आज मै आया हूॅ ,अपने दोस्तो के सम्पर्क में ।।
 फिजा भी दमदार हो गया ,
जिन्हे मै दुश्मन कहती थी ,
वो दुश्मन भी दोस्त में बरकरार हो गया ।।
 फोन का सम्पर्क टूटते - टूटते जुड गया ,
मेरा दोस्त बिछडते- बिछडते मिल गया ।
दिन और रात्री का सम्पर्क महफिल सजाता है
सच्चे मित्र का सम्पर्क दुनिया बनाता है
      दिलो की दास्ताॅ कब तक छुपायेगे , ऐ मेरे दोस्त 
      तेरे सम्पर्क मे आने से , दुनिया को रंगीन बनायेगे ।
       महफिल तो अपने आप ही सज जायेगी,
       जब गुब्बारे तुम फूलायोगे ☺☺  ।।

     काव्य 
   ~~रबिना विश्वकर्मा

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3 Comments

Saba Rahman

24-May-2022 09:23 PM

Nyc one

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Mchoudhary

21-May-2022 07:55 PM

Bht shandaar

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Gunjan Kamal

21-May-2022 07:06 PM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌🙏🏻

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