rahul mishra

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फिर कहते हो आवाज़ कर

कुत्ता रोता रात भर
दुनिया लिक्खे चाँद पर
तारों की बारात पर
फिर कहते हो आवाज कर
चींटी खोजे भात घर
हुमको प्यारा राजघर
रीझें हम प्रासाद पर
फिर कहते हो आवाज कर
घोड़े सब खैरात पर
गधहे चरें परात भर
हम तुम झूमें बाजार स्वर
फिर कहते हो आवाज़ कर
मुक्ता खुद कारागर
खुल्ले घूमे चारागर
हम तुम छोड़ें ईश्वर पर
फिर कहते हो आवाज़ कर
क्रांति के संवाद पर
कप में अपने चाय भर
बस भगत सिंह आज़ाद भर
कौन लगाए त्याग की झर
अपनी दुनिया अपने ज्वर
इक दिन सब कुछ है नश्वर
फिर क्यों कहते हो आवाज़ कर
राहुल मिश्र

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4 Comments

Khushh

10-Feb-2021 10:32 PM

very nice

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Manish Kumar(DEV)

03-Feb-2021 06:46 PM

good

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Habiba

03-Feb-2021 03:56 PM

Good

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rahul mishra

03-Feb-2021 06:08 PM

thank u :)

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