04-Jun-2022 لیکھنی کی کہانی -prtiyogita k liye
वो भी बेबफा था मैं भी बेबफा थी
इसमें न जाने किसकी ख़ता थी
दिल को लगाना मेरे बन गई सज़ा थी
इसमें न जाने किसकी ख़ता थी
उनकी खुशी कि ख़ातिर बिछड़े थे उनसे
दिल से मुहब्बत लेकर निकले थे उनके
उनको लगा के हमने की वो दग़ा थी
इसमें न जाने किसकी ख़ता थी
......वो भी बे
जाएंगे वो दूर तो हम बुलाएंगे कैसे
यादें उनकी दिल में होंगी मिटाएंगे कैसे
भुलाएंगे कैसे उनको भुलाना भी जफा थी
इसमे न जाने किसकी ख़ता थी
......वो भी बे
जिनको अपना कहते थे वो अजनबी से लगते हैं
ग़ैरों के वो हो गए और मतलबी से लगते हैं
रोते रोते रातें गुज़रीं गिला किससे करते हम
हमको रूलाना उनकी बन गई अदा थी
..... वो भी बे
Gunjan Kamal
04-Jun-2022 08:23 AM
👌👏🙏🏻
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Sona shayari
04-Jun-2022 08:02 AM
Nice
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Arvaz Ahmad
09-Jun-2022 11:50 AM
Shukriya
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Renu
04-Jun-2022 03:14 AM
👍👍
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Arvaz Ahmad
04-Jun-2022 03:25 AM
Bhot shukriya
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