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लेखनी कहानी -06-Jun-2022

       

   विषय :- अब बारी अपनी है
 
       सम्मान से जीने की
            अब बारी अपनी है।।
     किसी के आगे नही झुकाऊॅगी सर,
         क्योकी ,अब बारी अपनी है।।

        तूने बहुत रूलाया मुझे ,
        सब लोग भी रोये तेरी पनाहो मे ।
     रोते हुए को भी हसाना है ,
   क्योकी अब बारी अपनी है ।।

 हार मिले चाहे जीत मिले , इसमे कोई जिक्र नही  
हम कोशिश भी ना करे , सुनकर बड़ी फिक्र हुई ।।
 
     कल की तलाश मे ,
     आज को नही भूलना है ।
  कल चाहे जो भी हो,
आज को बेहतर बनाना है,
क्योकी, अब बारी अपनी है ।।

अपने आप को दुनिया मे दिखाने की ,
    अब बारी अपनी है, अब बारी अपनी है
 
 
 
        ~~रबिना विश्वकर्मा
     उ•प्र (जौनपुर ) 222128
 

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9 Comments

Kaushalya Rani

08-Jun-2022 05:23 PM

Nice

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Reyaan

07-Jun-2022 08:16 PM

बहुत खूब

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Swati chourasia

07-Jun-2022 10:51 AM

बहुत खूब 👌

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