बातें
बातों बातों में ही कुछ
बातें निकल आती है
कुछ बातें मन को छू
जाती है....
कुछ मन में शूल
चुभाती है...
कुछ चाहकर भी
कह नहीं पाते है ....
कुछ को सुनने से भी
कतराते है....
कुछ बातें हँसाती..
गुदगुदाती है...
कुछ याद आ कर बहुत
रुलाती है.....
कुछ तो इक क्षण भी
ना टिक पाती है....
कुछ सदियों सी चलती
जाती है......
बातों से ही बहुत
कुछ बनता है...
कभी इनसे बना
बनाया खेल भी बिगड़ता है...
कभी बातों में यूँ ही समय
बर्बाद होता है....
समझें.. तो समय रहते हर
बात का ज्ञान होता है.....
कुछ...बातों से जीवन की
सीख दे जाते है.....
कुछ...इधर उधर की बातों
में उलझें ही रह जाते है....
इक ही बात के जाने कितने
अर्थ निकाले जाते है....
कभी अतीत की निरर्थक बातों से
पछताते रह जाते है.....
बातों से ही कितना कुछ
खोते और पाते है...
भारी बातों का बोझ
ना जाने कितने दिन
हम ढ़ोते है...
सिलसिला बातों का यूँ ही
चलता रहता है.......
ख़त्म हो जाते है.. हम
पर ये बातें खत्म
नहीं हो होती है.....
#प्रतियोगिता हेतु
स्वरचित
शैली भागवत 'आस'✍️✍️
Seema Priyadarshini sahay
11-Jun-2022 04:51 PM
Nice
Reply
Swati chourasia
11-Jun-2022 10:43 AM
Very beautiful 👌
Reply
Abhinav ji
11-Jun-2022 09:25 AM
Nice👍
Reply