Sarfaraz

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स्वैच्छिक

🌹🌹🌹🌹 ग़ज़ल 🌹🌹🌹🌹

उल्फ़त वफ़ा खुलूस इ़नायत की बात बस।
कीजे ह़ुज़ूर सबसे मुह़ब्बत की बात बस।

नफ़रत भरी हवाओं के औसान देख कर।
होंटों में दब के रह गई उल्फ़त की बात बस।

झगड़े करा के मज़हबो मिल्लत के नाम पर।
कुछ लोग कर रहे हैं सियासत की बात बस।

इल्ज़ाम हम पे इतने लगाए गए के हम।
हर वक़्त सोचते हैं ज़मानत की बात बस।

देखो जिसे भी ज़ह्र है उसकी ज़ुबान में।
इक हम ही कर रहे हैं ह़लावत की बात बस।

कहने को उनमें वैसे तो कोई कमी नहीं।
डूबेगी उनको ले के ये नख़वत की बात बस।

सब आपको भी दिल से लगा लेंगे ऐ फ़राज़।
गर आप छोड़ दें ये सदाक़त की बात बस।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ मुरादाबाद उ0प्र0।

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9 Comments

नंदिता राय

14-Jun-2022 06:48 PM

बेहतरीन

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Milind salve

13-Jun-2022 06:00 PM

बहुत खूब

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Kaushalya Rani

13-Jun-2022 04:18 PM

nice

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