Arvaz Ahmad

Add To collaction

लेखनी कहानी -16-Jun-2022 mahek

क्यों लगता है बिखरने का हुनर सिखाएंगे 

तेरे ग़म तुझको संवरने का हुनर सिखाएंगे 

शौक से ले जाओ मेरी ज़ीस्त से खुशियों के फूल 
हम काँटो को महकने का हुनर सिखाएंगे 

नखुदा छोड़ के तूफाँ में हमे खुश न हो 
यही तूफाँ हमे तैरने का हुनर  सिखाएंगे 

उसने मेरी मुहब्बतों को पल में भुला दिया
हम भी अब दिल को भूलने का हुनर सिखाएंगे

   18
14 Comments

Pallavi

19-Jun-2022 10:02 AM

Nice post

Reply

Arvaz Ahmad

19-Jun-2022 11:26 AM

Shukriya

Reply

Seema Priyadarshini sahay

17-Jun-2022 04:03 PM

बेहतरीन रचना

Reply

Arvaz Ahmad

17-Jun-2022 04:17 PM

Shukriya

Reply

Swati chourasia

17-Jun-2022 06:53 AM

Very beautiful 👌

Reply

Arvaz Ahmad

17-Jun-2022 07:36 AM

Shukriya

Reply