महक
महक
खुशी हो या गम आये, तुम मेरे लिए हो
मौसम कैसा भी आये, तुम मेरे लिए हो।
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मन की आवाज़ जब भी सुनना चाहो तो
दिलकश सुरीला साज, तुम मेरे लिए हो।
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दुनिया की तमाम रिवायतों से परे कहीं
हक़ीक़त ख़्वाब के बीच,तुम मेरे लिए हो।
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किसी भी ज़ियारत से न हो कभी हासिल
वो ज़िन्दगी का फलसफ़ा,तुम मेरे लिए हो।
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मुरझा कर भी महक बरकरार रखो सदा
ऐसा एक नायाब फूल, तुम मेरे लिए हो।
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अशांत मन की हलचल में ठहराव लिए
निर्मल शांत सरोवर, तुम मेरे लिए हो।
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जमाने की हिकायत से खाक होने से बचा
जीने की आस दिखाते, तुम मेरे लिए हो।
#प्रतियोगिता हेतु
स्वरचित
शैली भागवत "आस"✍️
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Pallavi
18-Jun-2022 09:59 PM
Nice post 😊
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Gunjan Kamal
17-Jun-2022 02:07 AM
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌🙏🏻
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Priyanka06
16-Jun-2022 08:55 PM
बहुत सुंदर रचना मैम
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Shaily Bhagwat
16-Jun-2022 10:32 PM
Shukriya 💐
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