Shaily Bhagwat

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हमारे पिता

हमारे पिता 


जन्मभूमि से कर्मभूमि की ओर जो ले जाते है
घर से बाहर की दुनिया से पहचान कराते है
हमारी ऊँगली पकड़ चलना हमें सिखाते है
सपनों को पूरा करने का हौसला दिलाते है।

हाँ,वो हमारे पिता होते है.....

हिमालय से विशाल अडिग सदा रहते है
समन्दर बन चिंताओं को समेटे रहते है
गर्मी की तपिश में ठंडी छाँव बन रहते है
पतझड़ में मधुमास का आभास देते है।

हाँ, वो हमारे पिता होते है.......

स्वप्ननों का हमारे आधार बनकर रहते है
हर कदम मनोबल हमारा बढ़ाते रहते है
राहों से हमारी हर कंटक चुनते रहते है
पंखों को मज़बूत बना विस्तार जो देते है

हाँ, वो हमारे पिता होते है......

अथक परिश्रम कर सुख सुविधा का जरिया बने
कठोर संघर्षों को झेल  परिवार के पालनहार बने
स्वाभिमान,अनुशासन का जीवन में एक पाठ बने
गहरे अनुभव, मार्गदर्शन की अनमोल किताब बने

हाँ, वो हमारे पिता होते है......

जिस वटवृक्ष की छाया तले सुरक्षित हमारा साया है
जिस दीपक की रोशनी से घर भर में रहे उजाला है
त्याग,तपस्या की मूरत बन लुटाते सदा रहे माया है
मान, सम्मान,अभिमान का आशीष जिससे पाया है

हाँ, वो हमारे पिता होते है......

कांधे से तुम्हारे ही हमें मिला मज़बूत सहारा है
तुम बिन कहाँ कब इस जग ने हमें पहचाना है
संतानों को गर्व का ये अनुभव तुमसे आया है
तुमसे महान हम भी बने यहीं प्रयास हमारा है

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
आज पितृ दिवस पर शत शत नमन तुम्हें हमारा है।


#प्रतियोगिता हेतु 

स्वरचित
शैली भागवत "आस"✍️


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11 Comments

kashish

12-Feb-2023 11:20 AM

nices

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madhura

01-Feb-2023 02:32 PM

nice

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shweta soni

17-Jul-2022 11:42 PM

Bahot sunder 👌

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