Ashwini Ingle

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यादें!

जैसी रेत फिसलती है
एक पल में हाथों से,
कुछ पल भी निकल जाते है
रहती है बस यादें!

कुछ यादें दर्द बनती
कुछ मरहम बन जाती है,
जैसी भी यादें मगर
याद जरूर आती है!

-अश्विनी इंगळे

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4 Comments

Aliya khan

03-Aug-2021 09:23 AM

Nice

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Mukesh Duhan

29-Jul-2021 05:24 PM

Beautiful

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Ashwini Ingle

29-Jul-2021 10:18 PM

Dhanyawad😊

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Ravi Goyal

29-Jul-2021 05:23 PM

Bahut khoob 👌👌

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