लेखनी कहानी -03-Jul-2022
विषय :- अधूरी दास्ताॅ
ख्याल तेरा जब भी आता है
रो पड़ती हूँ मैं
तेरी यादों की बिस्तर में
रोज सो पड़ती हूँ मैं
तूने हमें अपने लगे से लगाया था
खुद रो कर हमें हॅसाया था
अधूरी चीजें भी पूरी लगती थी
तेरी हर डाँट में भी तेरा प्यार दिखता था
तेरी हर बात ख्याल करके रो पड़ती हूँ मैं
ख्याल से ख्याल करके भी कुछ नहीं लिख पाती हूँ मैं
हर वक्त अधूरी दास्ताॅ ही लिख पाती हूँ मैं
तेरी ख्याल में ही रोज सो जाती हूँ मैं ।।
🖎🖎🖎 रबिना विश्वकर्मा
उ•प्र•जिला जौनपुर हथेरा
Chudhary
07-Jul-2022 12:12 AM
Nice
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Pallavi
05-Jul-2022 03:15 PM
बहुत खूब
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Swati chourasia
04-Jul-2022 08:18 AM
बहुत खूब 👌
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