Shaily Bhagwat

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माँ

🌹"माँ"🌹

कहो न कहो माँ सब कुछ जानती है।
उम्र के हर दौर में तुम्हें पहचानती है।
जन्म दे कर इस दुनिया में लाती जिन्हें
वही दुनिया उसे कमतर आंकती है।

तिरस्कार का दंश हर मोड़ पर सहती है।
उपेक्षा का पर्याय प्रतिदिन ही बनती है।
तनमन से सब नकारते आये उसे सदा ही
स्वजन प्रेम के वशीभूत सब स्वीकारती है।

जग की चकाचौध से आकर्षित होती है।
कुछ सपने जीने की वो लालसा रखती है।
कोख को तुम भूला दो भले ही उसकी
वो न कभी अपने अंश को बिसरती है।

रोकती टोकती वो आँखों में चुभती है।
यथार्थ से परिचय तुम्हारा वो कराती है।
सत्य जान भी न्योछावर सब कर देती 
शायद इसीलिए...
वो जननी महान कहलाती है।

#प्रतियोगिता हेतु

शैली भागवत "आस"✍

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8 Comments

Shrishti pandey

06-Jul-2022 01:23 PM

Nice

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Priyanka06

06-Jul-2022 11:59 AM

बहुत सुंदर रचना

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Abhinav ji

06-Jul-2022 07:33 AM

Nice

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