Shaily Bhagwat

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ख़्वाहिश

ख़्वाहिश

आज बादलों से बारिश का अंदेशा है बहुत

दिल की ख्वाहिशों पर फिर एतमाद हो जाए।


काश एक बार फिर से मुलाक़ात हो जाए,

शायद वो अधूरा ख़्वाब मेरा पूरा हो  जाए।


रिश्तों पर जमी ख़ामोशियों की परतें हटा

आज फिर वैसे ही बेबाक बात हो जाए।


शिकवे शिकायतों के दौर के बाद चलो अब

बूंद -बूंद मुस्कुराहटों की बारिश हो जाए।


जो आसमानों से उतर कभी आते नहीं उन्हें

भी इस जमीं को छूने की आदत हो जाए।


सुनहरी धूप में बिखेरे थे जो सपने दिनभर

रातों को उन्हें समेटने की चाहत हो जाए।


जीवन की दौड़ से थक गया जो मुसाफिर

शाम इक सुकून की उसे मयस्सर हो जाए।


सुखों के चंद पलों की बस दरकार है रहती

मिलो तो मुसलसल गमों से राहत हो जाए।


मैं मुख़्तलिफ़ किरदार हूँ इस जहान के लिए

मुझे हर पल कुरेदने में इन्हें आराम हो जाए।


मेरी तकलीफ में कोई मुझसे मुख़ातिब न हो

और तरक्की से मेरी सब परेशान हो जाए।


मुखलिस अब कोई नज़र आता नहीं मगर

"आस" है ऐसे शख्स से मुलाक़ात हो जाए।


#प्रतियोगिता हेतु 


स्वरचित एवं मौलिक

शैली भागवत "आस"✍️


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12 Comments

Saba Rahman

16-Jul-2022 11:13 PM

😊😊😊

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Chudhary

16-Jul-2022 10:04 PM

Nice

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Rahman

16-Jul-2022 09:53 PM

Nyc👏👏

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