संसार
संसार
दिल में अरमान आँखों में सहर रखते है
खुद के संसार में ये लोग बसर रखते है।
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इस जमाने में कोई भी तो हमारा न हुआ
और हरवक़्त हम सबकी खबर रखते है।
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जो नहीं समझे कभी भी मेरे जज्बातों को
हम भी अब उनसे उम्मीदें सिफ़र रखते है।
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ये दुनियादारी महज एक दिखावा है यहाँ
इस बहाने से लोग हम पर नज़र रखते है।
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मांगते है हरपल नाकामयाबी वो हमारे लिए
भूले कि हम भी दुआओं का असर रखते है।
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हम जिन्हें समझे है पाक इबादत की तरह
नूर भरपूर मगर वो दिल में ज़हर रखते है।
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इसे दीवानगी या दिल की कोई आस कहो
बेखबर सबसे हम अपनी इक दहर रखते है।
#प्रतियोगिता हेतु
स्वरचित एवं मौलिक
शैली भागवत आस
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shweta soni
21-Jul-2022 11:05 AM
Nice 👍
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Punam verma
21-Jul-2022 09:17 AM
Nice
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Raziya bano
21-Jul-2022 08:55 AM
Bahut sundar rachna
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