घाव खुले में मत छोड़ो
घाव खुले में मत छोड़ो
बस एक दुआ करते जाना
न दर्द मिले न घाव मिले
हर कोई लगाकर मरहम, फिर से
उसे कुरेदने बैठा है
बस गुजारिश है सबसे
ये घाव खुले में मत छोड़ो।
बस तन्हा ही चलते जाना
रास्ते भले दो चार मिलें
हर तरफ हैं अब, दरिंदे ही
जो दर्द बढ़ाने बैठे हैं
बस गुजारिश है सबसे
ये घाव खुले में मत छोड़ो।
बस अश्क़ बहाते मत जाना
खत्म भले संसार मिले
एक धागा दुख का दिख जाए
हर कोई उसे, खींचने बैठा है
बस गुजारिश है सबसे
ये घाव खुले में मत छोड़ो।
बस डर संभाले मत जाना
चाहे अँधेरा अपार मिले
एक छोटा टुकड़ा कट जाए
उसे हर कोई दबाने बैठा है
बस गुजारिश है सबसे
ये घाव खुले में मत छोड़ो।