आदमी बनाते हैं
1212-1122-1212-22/112
हर एक दर्द के बदले खुशी बनाते हैं,
नये सिरे से कहीं छत नई बनाते हैं//1
जिसे पता ही नहीं प्यास की कशिश क्या है,
हम उसके दिल में नई तश्नगी बनाते हैं//2
न छूने पाए तअस्सुब कभी ज़िया जिसकी,
चलो हम एक नई रोशनी बनाते हैं//3
दिलों में लोगों के इंसानियत जगा कर हम,
जो लाश हैं उन्हें अब आदमी बनाते हैं//4
बड़ा अजीब है रिश्ता हमारा सागर से,
हम उसकी प्यास की ख़ातिर नदी बनाते हैं//5
न कल की बात करो कल किसी ने कब देखा,
चलो नसीब नया आज ही बनाते हैं//6
नहीं है काम कुछ इसके सिवा हमें 'राजन',
उदास चेहरों की ख़ातिर ख़ुशी बनाते हैं//7
राजन तिवारी 'राजन'
इंदौर (म.प्र.)
7898897777