रक्षा बंधन




भाई बहन का ये त्यौहार
फिर से आया है,इस बार
फिर से बांधूंगी मैं राखी,
फिर से मैं लूंगी उपहार,

साल भर चाहे जहां रहो,
आज तो मेरे यहां रहो,
माथ तिलक औ रोली होगी,
इस पर मेरा है अधिकार,

मिल बैठेंगे बात करेंगे,
इक दूजे के सुख दुख बांटेंगे,
कैसी हैं अम्मा और बापू,
कैसी छोटी बहन हमार,

बचपन की हंसीवो्ठिठोली
छूट गये सारे हमजोली,
कैसे तुम्हें बताऊं अब मैं,
तरस गयी सुनने को बोली,

अच्छा तुम कैसे हो,बतलाओ,
मेरे हाथ से भोजन खाओ,
बहुत चाव से मैंने पकाया,
कैसा बना है मुझे बताओ,

सुबह से बैठी पलक बिछाकर,
हाथ में मेहंदी खुद को सजाकर,
लाओ अपनी सूनी कलाई,
कल फिर जाना राखी बंधाकर,

बहन मैं तेरे घर आया हूं
तुझको बहुत खुश पाया हूं,
क्या तू मुझसे छिपा रही है 
आंखें भी कुछ बता रहीं हैं

मैं तेरा ही भाई हूं बहना
पढ़ लेता हूं तेरे नयना,
मुझसे कुछ भी नहीं छिपाना
कोई बहाना नहीं बनाना

तू रहे हमेशा ही आबाद,
ये है मेरा आशिर्वाद
तुझसे मैं हूं मुझसे तू,
तुझसे ही मेरा संसार,



सन्तोषी दीक्षित कानपुर

   12
6 Comments

सुन्दर सृजन

Reply

Abhinav ji

12-Aug-2022 08:35 AM

Very nice👍

Reply

Renu

12-Aug-2022 07:21 AM

👍👍

Reply