Sahil writer

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जज़्बात




जज्बातों के समुन्दर ने फिर भूचाल मचाया है l

भावरों के जंजाल मेँ मुझ को खूब फसाया है l

यादें बरसातों की जिगर मेँ आग लगा रही है l

आँखों से बहता पानी भी शोले भड़का रहा है l 

जीवन की नैया बीच माझधार मेँ हीचकोले खा रही है l 

मिलता नहीं साहिल अब तो जान मेरी जा रही है l  



Sahil writer..............


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5 Comments

Niraj Pandey

18-Aug-2021 03:08 PM

वाह👌

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Swati chourasia

18-Aug-2021 02:37 PM

Very nice 👌

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Sangeeta

18-Aug-2021 01:42 PM

Nice

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