जिंदगी तेरी जुस्तजू
आदरणीय दोस्तों, एक ताज़ा ग़ज़ल आपकी समाअतों की नज़्र कर रहा हूँ, म2122-1212-22/112
जिंदगी तेरी जुस्तजू भी नहीं,
कोई उम्मीद तेरी सू भी नहीं//1
मुझसे दिल का अजीब है रिश्ता,
हमनवां भी नहीं, अदू भी नहीं//2
इक़ तो लम्बा है जिंदगी का सफ़र,
और चलने को साथ तू भी नहीं//3
जब भी आँखों में उसकी देखा है,
कुछ छुपा भी नहीं, नुमू भी नहीं//4
हक़ महब्बत का हो अदा कैसे,
जिस्म में अब मिरे लहू भी नहीं//5
कैसी बेरंग है ये फ़सले बहार,
अब तो गुलशन में रंग-ओ-बू भी नहीं//6
रोज आता है वो ख़यालों में,
सामने भी है रू-ब-रू भी नहीं//7
किस दर-ए-दिल प जाके दस्तक़ दूँ,
कोई सरगोशी कू-ब-कू भी नहीं//8
कल मिला था कोई मुझे 'राजन',
तेरे जैसा भी, हू-ब-हू भी नहीं//9
✍️
राजन तिवारी 'राजन'
इंदौर (म.प्र.)
7898897777
Abhishek sharma
13-Feb-2021 11:21 PM
bohut achcha likha sir
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Rajan tiwari
15-Feb-2021 12:22 AM
Bahut bahut shukriya aapko
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Manish Kumar(DEV)
13-Feb-2021 11:05 PM
Nice 👍🏽👍🏽
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Rajan tiwari
15-Feb-2021 12:22 AM
Bahut shukriya aapka
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