लेखनी कहानी -22-Sep-2022
नसीब लिखने बैठे थे खुदा
खत्म हो गई स्याही मुझ तक आकर
रुक्सत किये थे उन्होंने खुशिओं के बड़े काफिले
रुक गई खुशिओं के आवाजाही मुझ तक आकर
बाँटने निकले थे मसीहा आबे हयात
खत्म हो गई दवाई मुझ तक आकर
जी में आया कि रिहा कर दूँ खुद को हर ग़म से
क़ैद बन गई वो रिहाई मुझ तक आकर .
Raziya bano
23-Sep-2022 07:40 PM
Nice
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Swati chourasia
23-Sep-2022 03:27 PM
बहुत खूब
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Muskan khan
23-Sep-2022 03:27 PM
Very nice
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